कांग्रेस की मांग 24 हजार 6 सौ करोड़ का किसानों के लिये बजट लायें सरकार

०० भूपेश बघेल ने विधानसभा में 4 साल का 2100 रू. का समर्थन मूल्य और 3 साल का बोनस देने की मांग को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया 

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आज विधानसभा में एक दिन का सत्र बुलाये जाने पर सरकार को किसान की बदहाली एवं आत्महत्या के लिये जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि पावस सत्र ढाई दिन में समाप्त कर दिया गया था। हम लोगो ने पावस सत्र के पहले दिन किसानों की आत्महत्या पर स्थगन लाया था, उस पर चर्चा हुई थी। किसानों की समस्या, परेशानी, दुःख दर्द और अर्थव्यवस्था में बहुत विस्तार से हम लोगो ने सदन में चर्चा की। यदि सरकार संवेदनशील होती तो उसी दिन  बोनस की घोषणा कर सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सत्र के दूसरे दिन जलकी गांव के जमीन का मामला आया, तीसरे दिन पनामा पेपर लीक का मामला आया। जैसे ही पनामा पेपर लीक का मामला विधानसभा में हम लोंगो ने लाया, मुख्यमंत्री और सरकार को ये बर्दाश्त नहीं हुआ और आधे दिन में ही पूरी कार्यवाही पूरा कर सदन से पलायन कर गये और आनन-फानन में सत्र समाप्ति की घोषणा कर दिया गया।

आज हमारे मुख्यमंत्री को चाऊर वाले बाबा, खुमरी वाले बाबा, पानी वाले बाबा, दारू वाले बाबा, अब कंबल वाले बाबा, फलाहारी बाबा। क्या-क्या उपमाओं से विभूषित नहीं किया जाता रहा है।

सन् 2008 के चुनाव के समय जनता के बीच गये थे। उसके पूर्व विधानसभा के आखिरी सत्र में हम लोगो ने मुख्यमंत्री जी से कहा था कि केन्द्र सरकार 50 रूपया बोनस दे रहा है तो आप कम से कम किसानों को 5 रूपया तो दे दो, तो बोले थे कि बोनस देने का सवाल ही नहीं उठता। हमारे सहकारिता मंत्री जी जो अभी विदेश से घूमकर आये है, बिलासपुर में उन्होंने बयान दिया कि छत्तीसगढ़ के किसानों को बोनस की आवश्यकता नहीं है।

2008 में ही विधानसभा चुनाव के पहले एक बहुत बड़ा किसान सम्मेलन हुआ था, वहां हम लोगो ने प्रस्ताव किया था कि कम से कम छत्तीसगढ़ में हमेशा 3 साल में अकाल की स्थिति बनती है, एक साइकल चलता है। छत्तीसगढ़ एक फसलीय है। यहां धान के अलावा कुछ होता नहीं है। छत्तीसगढ़ के खजाने में पैसे की कमी नहीं रहती है और यदि किसानों की अर्थव्यवस्था सुधारना है, तो कृषि सिंचाई एवं किसानों के लिये कुछ ठोस कार्यक्रम बनाना होगा। प्रदेश में जो लगातार पलायन हो रहा है, जो छत्तीसगढ़ के लिये अभिशाप है, उसे रोकना है तो जो मेहनतकश लोग है, उन्हें प्रोत्साहित किया जाये, किन्तु हम जानते है सरकार कोई भी कार्यक्रम/योजना बनाने से पहले देख लेती है कि इसमें कमीशन आयेगा की नहीं। लेकिन बोनस देना है तो वहां तो कोई कमीशन की बात हो ही नहीं सकती। चप्पल बांटना है तो उसके पहले तय हो जाता है, पुस्तक-कापी बांटना है तो उसमें पहले तय हो जाता है, सायकल, नमक, चांवल, चना बांटना है, तो उसमें पहले से तय हो जाता है कि कितना मिलना है। अब मोबाईल बांटने की बारी है, उसमें भी आगे चलकर पता चलेगा कि वह कितने का है और मार्केट में कितने में मिलता है उसमें कितना अंतर है और कितना कमीशन में जा रहा है।

हमने सरकार पर दबाव बनाया, यदि किसानोें को बोनस दे दिया जाये तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और तभी छत्तीसगढ़ खुशहाल हो सकेगा। क्योकि छत्तीसगढ़ किसानों का प्रदेश है। एम.एस.पी तय हो जाये, उसमें यह नहीं देखा जाता है कि छत्तीसगढ़ में कितना कास्ट (लागत) आता है, उसमें उड़ीसा का भी जुड़ता है, साऊथ का भी जुड़ता है, पंजाब का भी जुड़ता है, हरियाणा का भी जुड़ता है। जो उन्नत प्रदेश है, वहां के लागत मूल्य के हिसाब से एम.एस.पी. निर्धारित होता हैं अगर उस हिसाब से देखे तो छत्तीसगढ़ का किसान केवल 4 महीने काम करता है। यहां एक फसल का उत्पादन होता है और उससे पूरे साल भर उन्हें अपने परिवार का खर्च उठाना पड़ता है। वह चाहे उससे पढ़ाई करे, इलाज करे, परिवार का भरण-पोषण करे, उसमें सब चीज आता है। वासुदेव चन्द्राकर जी के जयंती के अवसर पर कांग्रेस ने 250 रू. बोनस का प्रस्ताव किया था। भाजपा ने आनन-फानन में घोषणा पत्र तैयार किया, फोटो कापी करके बांटा और उसको 270 रूपया कर दिया। जनता ने रमन सिंह के ऊपर विश्वास किया और उनको सरकार में बिठा दिया। फिर क्या हुआ? विधानसभा सम्पन्न हुआ तो उस समय बोनस दे दिये। फिर दूसरे साल केन्द्र सरकार की जो 50 रूपया जोड़कर फिर कटौती करके दिये और तीसरे साल देना बंद कर दिये। स्थिति यह बनी कि चुनाव के साल बोनस और तीन साल के बाद तैह कोनस। बीच में गेप। किसानो को कौन है, पहचानना भूल गये। आंदोलन तेज हुआ, तो मुख्यमंत्री जी राजनांदगांव में घोषणा करते है कि फिर से 2013 के बाद मेरी सरकार आती है तो मैं हर साल बोनस दूंगा। उन्होंने यह बात सार्वजनिक रूप से कही।

स्व. नंदकुमार पटेल जी ने कहा कि हमारी सरकार आयेगी तो हम 2000 रूपये क्विंटल में धान खरीदेंगे। उन्होने क्यों कहा ? इसी पवित्र सदन में सर्वसम्मति से पारित हुआ है। केन्द्र सरकार से अनुरोध किया गया था कि धान का समर्थन मूल्य 2000 रूपये प्रति क्विंटल हो, ऐसा इस सदन में प्रस्ताव आया था। भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा कि हम 2100 रू. में धान खरीदेंगे, 300 रू. प्रतिविक्ंटल बोनस देगे। कुल 2400 रू. प्रतिक्विंटल धान की कीमत होगी। एक-एक दाना धान खरीदेंगे, मुफ्त में बिजली देंगे, ये सारी बाते भाजपा ने कही, आप ने कही। जिसके चलते आपकी सरकार फिर से बन गई। सरकार बनने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री जी प्रधानमंत्री को 2100 रू. समर्थन मूल्य के लिये पत्र लिखते है, हर सप्ताह लिखते रहे मई 2014 यह क्रम चलता रहा। जैसे ही नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने, मुख्यमंत्री जी की घिग्घी बंध गई। पत्र लिखना तो क्या वहां बोल भी नहीं पा रहे थे, किस मुंह से बोलें, कैसे बोलें? हमने इसी सदन में मुख्यमंत्री जी से कहा कि आप नहीं बोल सकते तो कम से कम समय ले लीजिये, पूरे 90 विधायक प्रधानमंत्री जी से बोलेंगे कि 2100 रू. समर्थन मूल्य दे दो और 300 रू. बानेस दे दो। इसी सदन में हमने कहा था लेकिन मुख्यमंत्री साहस नहीं कर पायें। किसानो के हक में खड़ें नहीं हो पायें और हुआ क्या? बल्कि उल्टा फरमान आ गया कि यदि आप बोनस देंगे तो समर्थन मूल्य में धान खरीदने के लिये पैसा आपको नहीं देंगे, जो गारंटी हम देते हैं वह नहीं देंगे। यह पत्र भारत सरकार के तरफ से आया और मुख्यमंत्री जी का हाथ पांव फूल गये। एक-एक दाना धान खरीदने की घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री ने तत्काल घोषणा की कि हम केवल 10 क्विंटल धान ही खरीद सकेंगे। उसी दिन कांग्रेस पार्टी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी 1 अक्टूबर, 15 अक्टूबर, 1 नवंबर को धान खरीदी करते थे, आपने उसे 1 दिसंबर कर दिया, हमने कहा इसके विरोध में एक भी किसान धान नहीं बेचा, 1 दिसंबर को एक भी किसान ने धान नहीं बेचा।  मुख्यमंत्री जी को बाध्य होना पड़ा किन्तु मंत्रालय में नहीं भाजपा कार्यालय में 15 क्विंटल धान खरीदने की घोषणा करनी पड़ी, जो किसानों के पक्ष में कांग्रेस की जीत थी।

मुख्यमंत्री जी ने 08/02/2014 के विधानसभा के सत्र में 5 वर्ष तक धान पर 300 रू. प्रतिक्विंटल बोनस देने की बात कही थी और इसके लिये आपने 2400 करोड़ रू. का प्रावधान किया था। मुख्यमंत्री जी यदि आप इस पवित्र सदन की गरिमा का ख्याल रखते हुये अपने वादो को हर साल पूरा कर रहे होते तो आज ये सदन का समय जाया नहीं करना पडता। विधायक नवरात्रि में अपने क्षेत्रों में रहकर लोगो की सेवा करते रहते। 2000 में 4000 करोड़ के बजट से शुरूआत होकर आज राज्य का 82000 करोड़ का बजट है और यदि अनुपूरक बजट को मिला दे, 84000 करोड़ का बजट हो जाता है। इस 84000 करोड़ के बजट में किसानों को देने के लिये आपके पास 2400 करोड़ नहीं है? आपके मंत्रियो एवं अधिकारियों को विदेश घूमने-फिरने के लिये पैसा है, मंत्रियो के बंगले सजाने के लिये पैसा है। बड़ी-बड़ी गाड़ियां खरीदने के लिये पैसा है लेकिन जो आपके अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है ऐसे अन्नदाताओं को देने के लिये आपके पास पैसा नहीं है। आप ही ने विधानसभा में कहा था कि कृषि योग्य भूमि 5603101 हेक्टेयर है, जो 1 जनवरी 2004 की स्थिति में है। वर्ष 2013 की स्थिति में 5551275 हो गयी। इस प्रकार कृषि जोत कम हुई और कृषि जोत में भी और कमी आयी है। लेकिन विधानसभा में ही मंत्री पुन्नूलाल मोहले जी जवाब देते है कि जो धान उत्पादक किसान है वो 37लाख 46 हजार है और 38 लाख हेक्टेयर में धान उत्पादन करते है। आपका ही जवाब है 14.50 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन होता है। कहां 37.46 लाख  और मात्र 14.51 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन आखिर क्यों बाकी किसान सोसायटी में नहीं आ रहे है, क्योंकि इसके लिये आपने दुनिया भर की शर्ते लगा रखी है। जिसके चलते छोटे और सीमांत कृषक रोजी, रोटी एवं परेशानियों से बचने के लिये रजिस्ट्रेशन नहीं कराता। वो सोसायटी में बेचने के बजाय कोचियां, राईस मिल, मंडी में बेचना आपके इस पेचिदे नियम के चलते ज्यादा अच्छा महसूस करता है। मुख्यमंत्री जी आपने सोसायटी में रजिस्ट्रेशन के लिये मोबाईल नंबर होना जरूरी रखा है यदि उन किसानों के पास मोबाईल होता तो आपको 55 लाख मोबाईल बांटना क्यों पड़ता? पनामा पेपर लीक में जो आपके घर का पता दिया है वह आदमी कौन है और इसीलिये यह सवाल आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष पूछ रहे है और वे जवाब नहीं दे पा रहे है। नान घोटाले में जो डायरी पकड़ी गयी है उसमें सीएम मैडम एवं मंत्री जी लिखा है लेकिन आप बता नहीं पा रहे है। प्रदेश के 24 लाख 46 हजार किसानों को आप बोनस नहीं देकर उनके साथ अन्याय कर रहे है। 120 लाख मीट्रिक टन उत्पादित धान में से 69 लाख मीट्रिक टन धान का बोनस देने का बहुत ही दुर्भाग्यजनक है। यदि 300 रू. के बोनस, समर्थन मूल्य का अंतर और इसका ब्याज जोड़ दे तो 3 साल का 1 क्विंटल के पीछे 4000 रू. होता है। प्रति किसानों को प्रति एकड़ 60 हजार से 80 हजार रू. के बदले आप केवल 300 रू. दे रहे है और आप अपना पीठ थपथपाने में लगे हुये है। आप किसानों को ठगने का काम कर रहे है ये बहुत ही लज्जाजनक बात है। आज राज्य में जिस ढंग से आंदोलनरत किसानों की धर-पकड़ की जा रही है वह आपातकाल से भी बुरी स्थिति का एहसास कराता है। यही कारण है मुख्यमंत्री जी कि आपके निर्वाचन जिले राजनांदगांव की सड़कों में 30000 से ज्यादा किसानों ने आपके खिलाफ नारा लगा रहे थे। ऐसा लगता है कि सरकार मंत्रालय से नहीं भाजपा कार्यालय से चल रही है। नौकरशाहों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। नौकरशाह खुद सरकार चला रहे है। मुख्यमंत्री कुछ अधिकारियों से घिरे हुये है। मुख्यमंत्री जी से चाहते है कि आपने जो 3 साल का बोनस और 4 साल का समर्थन मूल्य देने की बात पर कायम रहे। एक तरफ प्रदेश में सूखे की भयावह स्थिति है आपने 22 जिलों और 96 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है लेकिन इस सूखे में इस दुख में किसान की इस पीड़ा मे, तकलीफ में, आपदा में आप फटाखा फोड़ रहे है, मिठाई बांट रहे है, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता जश्न मना रहे है, लेकिन आत्महत्या पीड़ित परिवारो के प्रति संवेदना के एक शब्द आपके पास नहीं है। हम सरकार से किसानो के हित में आग्रह करते है कि 2100 करोड़ के बजाय 24 हजार 6 सौ करोड़ का प्रस्ताव किसानो को देने के लिये जिसका वायदा आप ने चुनाव के समय किया था, लायें तो उसका कांग्रेस विधायक दल पूरा समर्थन करेगी।

 

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