विश्वेश्वरैया आधुनिक भारत के विश्वकर्माः संजय श्रीवास्तव

रायपुर। भारतरत्न एम. विश्वेश्वरैया के जन्म दिन को अभियंता दिवस के रूप में सिविल लाईन में समारोह का आयोजन कर मनाया गया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं आरडीए अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने एम. विश्वेश्वरैया के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए संजय श्रीवास्तव ने वहां उपस्थित सभी लोगों को बाधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अभियंता दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 15 सितम्बर को मनाया जाता है। इसी दिन भारत के महान् अभियंता और भारतरत्न प्राप्त मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म दिवस पर उनको याद किया जाता है। आज भी मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को आधुनिक भारत के विश्वकर्मा के रूप में बड़े सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। अपने समय के बहुत बड़े इंजीनियर,वैज्ञानिक और निर्माता के रूप में देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को भारत ही नहीं,वरन विश्व की महान् प्रतिभाओं में गिना जाता है। एम. विश्वेश्वरैया का व्यक्तित्व एवं कृतत्व अभियंता समुदाय के लिए अनुकरणीय है एवं सदा प्रेरणा का श्रोत रहेगा। विश्वेश्वरैया को उनके कार्य दक्षता को देखते हुए उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया गया था। जन हित में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके बताये रास्ते पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। आज के दिन हम सभी एक जगह एकत्रित हो विश्वेश्वरैया के बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। हम उनके रास्ते पर चलकर ही देश को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

उन्होने आगे कहा कि एक सौ एक वर्ष का यशस्वी जीवन जीने वाले मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया सदैव भारतीय आकाश में अपना प्रकाश बिखेरते रहेंगे। भारत सरकार द्वारा 1968 ई. में डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जन्म तिथि को अभियंता दिवस घोषित किया गया था। तब से हर वर्ष इस पुनीत अवसर पर सभी भारतीय अभियंता एकत्रित होकर उनकी प्रेरणादायिनी कृतित्व एवं आदर्शो के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित कर अपने कार्य-कलापों का आत्म विमोचन करते हैं और इसे संकल्प दिवस के रूप में मनाने का प्रण लेते हैं। संकल्प अपने दायित्वों एवं कर्तव्यों का समर्पित भाव से निर्वहन करते हैं।उन्होने कहा कि भारत की आजादी के बाद नये भारत के निर्माण और विकास में प्रतिभावान इंजीनियरों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गांव एवं शहरों के समग्र विकास के लिए सड़कों, पुल-पुलियों और सिंचाई जलाशयों सहित अधोसंरचना निर्माण के अनेक कार्य हो रहे हैं। हमारे इंजीनियरों ने अपनी कुशलता से इन सभी निर्माण कार्यो को गति प्रदान की है। राज्य और देश के विकास में इंजीनियरों के इस योगदान के साथ-साथ अभियंता दिवस के इस मौके पर भारतरत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की प्रेरणादायक जीवन गाथा को कभी भुलाया नहीं जा सकता ।श्रीवास्तव ने कहा कि दक्षिण भारत के मैसूर, कर्नाटक को एक विकसित एवं समृद्धशाली क्षेत्र बनाने में मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का अभूतपूर्व योगदान रहा है। तकरीबन 55 वर्ष पहले जब देश स्वंतत्र नहीं था, तब कृष्णराजसागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्टरी,मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर समेत अन्य कई महान् उपलब्धियाँ मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के कड़े प्रयास से ही संभव हो पाई। इसीलिए इन्हें कर्नाटक का भगीरथ भी कहते हैं। जब वह केवल 32 वर्ष के थे, उन्होंने सिंधु नदी से सुक्कुर कस्बे को पानी की पूर्ति भेजने का प्लान तैयार किया,जो सभी इंजीनियरों को पसंद आया। सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के उपायों को ढूंढने के लिए समिति बनाई। इसके लिए विश्वेश्वरैया ने एक नए ब्लॉक सिस्टम को ईजाद किया। उन्होंने स्टील के दरवाजे बनाए,जो कि बांध से पानी के बहाव को रोकने में मदद करता था। उनके इस सिस्टम की प्रशंसा ब्रिटिश अधिकारियों ने मुक्तकंठ से की थी। आज यह प्रणाली पूरे विश्व में प्रयोग में लाई जा रही है। विश्वेश्वरैया ने मूसा व इसा नामक दो नदियों के पानी को बांधने के लिए भी प्लान तैयार किए। इसके बाद उन्हें मैसूर का चीफ इंजीनियर नियुक्त किया गया।समारोह में मुख्य रूप से महापौर प्रमोद दुबे, अभियंता संघ के के.पी.एन सिंग, आर.एन. गुप्ता,एम.एस. भदौरिया, ए.के. कुटारे,पी. के. खरे, श्री शर्मा, प्रमोद भास्कर, एस.एन. बाजपेयी, श्री योगेश, गोपाल मेनन सहित बड़ी संख्या में अभियंता मौजूद थे।

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