शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में रमन सरकार के प्रयास सराहनीय: केन्द्रीय मंत्री जावड़ेकर

०० हम सब मिलकर अक्षर ज्ञान की ज्योति को अंतिम गांवों तक ले जाएंगे: डॉ. रमन सिंह

०० मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान समारोह और अक्षर सम्मेलन का आयोजन

रायपुर| केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा और साक्षरता के विकास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासांे की तारीफ की है। श्री जावड़ेकर ने आज राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान समारोह और राज्य स्तरीय अक्षर सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए लोगों को सम्बोधित किया। समारोह में छत्तीसगढ़ के दो जिलों रायपुर और बलरामपुर सहित तीन विकासखंडों और सात ग्राम पंचायतों को साक्षर भारत अभियान के तहत मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान से नवाजा गया। डॉ. रमन सिंह और श्री जावड़ेकर ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। समारोह का आयोजन साक्षर भारत कार्यक्रम के तहत स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा किया गया।


श्री जावड़ेकर ने अध्यक्षीय आसंदी से समारोह में कहा – जब कभी मैं छत्तीसगढ़ आता हूं तो मुझे यहां एक नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा – पूरे देश को 2022 तक पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य है। छत्तीसगढ़ में लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य शासन द्वारा जनभागीदारी से किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए मुझे विश्वास है कि इस प्रदेश में यह लक्ष्य जल्द प्राप्त कर लिया जाएगा। श्री जावड़ेकर ने कहा – डॉ. रमन सिंह की सरकार राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष रूप से जोर दे रही है।  इसके लिए विभिन्न परियोजनाओं का मैदानी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन हो रहा है। उन्होंने राजधानी  रायपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय के अपने विगत दौरे का भी उल्लेख किया। श्री जावड़ेकर ने कहा  इस विद्यालय के बच्चों से मैंनेे शिक्षा के बारे में बातचीत की तो उन्होंने पूरे आत्म विश्वास के साथ जवाब दिया। श्री जावड़ेकर ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों और प्रशासनिक सेवा में छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों के बच्चों की बढ़ती उपस्थिति प्रदेश में शिक्षा के अच्छे स्तर को बताती है। यहां दूरस्थ अंचलों के नक्सल प्रभावित और पिछड़े क्षेत्रों के शिक्षा और विकास के मामले में अग्रिम पंक्ति में लाने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि साक्षर भारत अभियान से जुड़े प्रेरक और अनुदेशक राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा है। हम सब मिलकर अक्षर ज्ञान की ज्योति को प्रदेश के अंतिम गांवों तक ले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि  छत्तीसगढ़ के ऐसे जिले जिनमें साक्षरता का औसत प्रदेश के औसत 74 प्रतिशत से कम है, अगले तीन साल में उनके साक्षरता के औसत को प्रदेश के साक्षरता के स्तर तक ले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अन्त्योदय का आव्हान किया है, उनके जन्म शताब्दी वर्ष में हम  साक्षरता के सैनिकों, प्रेरकों, अनुदेशकों और पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से हम अक्षर ज्ञान की ज्योति को दूरस्थ गांवों तक ले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले बीजापुर का साक्षरता का प्रतिशत 38, सुकमा का 40, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में साक्षरता का प्रतिशत 48, बस्तर का 53, कोण्डागांव का 56, बलरामपुर 57 और कबीरधाम जिले का साक्षरता का प्रतिशत 60 है। इन  जिलों में साक्षरता का प्रतिशत प्रदेश के साक्षरता के औसत के बराबर लाएंगे। स्कूल शिक्षा और आदिम जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी समारोह को सम्बोधित किया। कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, संसदीय सचिव श्री अम्बेश जांगड़े, विधायक श्री श्रीचंद सुंदरानी, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री देवजी भाई पटेल, छत्तीसगढ़ संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष स्वामी परमात्मानंद प्रदेश शिक्षा आयोग के अध्यक्ष श्री चन्द्रभूषण शर्मा और छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग विशेष अतिथि के रूप में समारोह में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘साक्षर भारत अभियान’ के प्रतिवेदन और स्कूलों में वितरित किए जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और जीवन पर केन्द्रित पुस्तिकाओं तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के पोस्टर का अनावरण किया।मुख्य अतिथि की आसंदी से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने समारोह में कहा छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में श्री प्रकाश जावड़ेकर का योगदान सराहनीय है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में एक साथ 11 जवाहर नवोदय विद्यालयों और छह केन्द्रीय विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की। इस योगदान के लिए मुख्यमंत्री के आग्रह पर स्टेडियम में उपस्थित लोगों ने खड़े होकर श्री जावड़ेकर के प्रति आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने साक्षर भारत अभियान में प्रदेश के साक्षरता प्रेरकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए जा रहे सक्रिय योगदान की सराहना करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर जब नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के दो नक्सल हिंसा पीड़ित जिलों – दंतेवाड़ा और जशपुर को राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार और छत्तीसगढ़ की दो ग्राम पंचायतों – कर्माहा (जिला-सरगुजा) और टेमरी (जिला रायपुर) को भी अक्षर भारत राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया,  तो पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में नव साक्षरों के लिए अक्षर ज्ञान के साथ-साथ कम्प्यूटर की बेसिक जानकारी भी जरूरी है। हम कैशलेस अर्थव्यवस्था और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की ओर बढ़ रहे हैं। इन परिस्थितियों में कम्प्यूटर की जानकारी भी जरूरी है।


केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हमें वर्ष 2022 तक अपने देश को पूर्ण साक्षर बनाना है। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के समय वर्ष 1947 में साक्षरता प्रतिशत 18 था, जो अब बढ़कर 81 प्रतिशत हो गया है। अभी देश में 19 प्रतिशत लोग साक्षर नहीं है। श्री जावड़ेकर ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए साक्षर भारत अभियान से जुड़े सभी लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों की भागीदारी से यह लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 98 प्रतिशत बच्चे स्कूल जाते हैं। कक्षा छठवीं के बच्चों को प्रशिक्षण देकर घर में अपने माता-पिता और दादा-दादी को भी साक्षर बनाने के लिए तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन को संबंल के साथ ज्ञान और कौशल देकर अच्छा इंसान बनाती है। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा की प्रदेश में शिक्षा का बेहतर काम हो रहा है। बीजापुर से लेकर बलरामपुर तक बच्चों के सपने बड़े हुए हैं। सरस्वती साइकिल योजना से स्कूलों में छात्राओं की उपस्थिति 60 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गई है। श्री कश्यप ने कहा – प्रयास विद्यालयों के माध्यम से 23 बच्चों का भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में, 28 बच्चों का मेडिकल कॉलेज में और 119 बच्चों का एनआईटी में चयन हुआ है। नई दिल्ली के ट्रायबल यूथ हॉस्टल के माध्यम से तीन बच्चे भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के लिए चयनित हुए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री विकासशील ने बताया कि प्रदेश के 23 जिलों में साक्षर भारत अभियान का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान में साक्षर बनाने के लिए चिन्हित 31 लाख 39 हजार निरक्षरों ने तीसरी और पांचवी की परीक्षा सहित साक्षरता की वार्षिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। शहरी साक्षरता अभियान के तहत शहरी निकायों में 36 केन्द्रों में लोगों को मोबाइल, इंटरनेट, कैशलेस भुगतान और बैंक खातों के संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हर वर्ष आठ सितम्बर से साक्षरता सप्ताह का आयोजन किया जाता है और 15 सितम्बर को मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान समारोह एवं अक्षर सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। समारोह में ‘मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान’ के तहत प्रदेश के दो जिलों-रायपुर और बलरामपुर को प्रशस्ति पत्रों के साथ एक-एक लाख रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।  इनके अलावा विकासखण्डों-लखनपुर (जिला सरगुजा), छुईखदान (जिला-राजनांदगांव) और बस्तर (जिला बस्तर) को पचास-पचास हजार रूपए और प्रशस्ति पत्र भेंट किए गए। सात ग्राम पंचायतों-खैरझिटी (जिला कबीरधाम), सुखरीडबरी (जिला महासमुंद), मनिकोटा (जिला-सुकमा), तिलकेजा (जिला-कोरबा), लिगियाडीह (जिला-बिलासपुर), छोटे कलुआ (जिला-कोरिया), और भकुर्रा (जिला-रायगढ़) को पच्चीस-पच्चीस हजार रूपए की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। जन शिक्षण संस्थान सरगुजा को भी इस अवसर पर मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान से नवाजा गया। समारोह में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार से सम्मानित जिले जशपुर और बस्तर सहित ग्राम पंचायतों टेमरी (रायपुर) और करमहा (सरगुजा) को भी सम्मानित किया गया। संबंधित जिलों के पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया। साक्षर भारत कार्यक्रम में सराहनीय योगदान के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रेरकों को भी सम्मानित किया गया।

 

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