आधुनिक भारत के निर्माता है इंजीनियर-मालिया

०० सीवीआरयू में मनाया गया इंजीनियर्स-डे

०० रेलवे के डीआरएम व एसईसीएल के डायरेक्टर पर्सलन का किया गया सम्मान

०० भावी इंजीनियरों ने माॅडल बनाकर दिखाई प्रतिभा

बिलासपुर। जब तक काम में प्रति आपको समर्पण, आत्म विश्वास और मानवीय मूल्य बोध नहीं होगा तब तक आप कुशल इंजीनियर नहीं बन सकते। आज के युग में इंजीनियरियों को अब अत्याधुनिक तकनीक की सोच से काम करना होगा, जिससे कि कम से कम संसाधन में ज्यादा से ज्यादा सुविधा समाज को दी जा सके। यह कार्य सिर्फ बेहतर इंजीनियर ही कर सकता है। एक अच्छा इंजीनियरिग बनने के लिए हमको स्किल पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इंजीनियर समाज को आधुनिकता की ओर ले जाते हैं।

उक्त बातें रेल्वे के डीआरएम बी. गोपीनाथ मालिया ने डाॅ.सी.वी.रामन् विश्वविद्यालय में आयोजित इंजीनियर्स -डे के आयोजन पर मुख्य अतिथि के आसंदी से ही। डाॅ.सी.वी.रामन् विश्वविद्यालय में महान भारतीय इंजीनियर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती पर उनके याद करते हुए इंजीनियर्स डे मनाया गया। श्री मालिया ने बताया कि देश के आज सुविधायुक्त ट्रेन चलाए जाने की जरूरत है ताकि मुंबई जैसी ट्रेनों की भीड़ को कम किया जा सके और यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित यात्रा कराई जा सके। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय रेल और जापान की रेल सुविधाओं के बारे में विद्यार्थियों को विस्तार से बताया। कार्यक्रम में रेल्वे के डीआरएम बी. गोपीनाथ मालिया और एसईसीएल के डायरेक्टर पर्सनल डाॅ.आर.एस झा का सम्मान किया गया। अतिथियों ने भावी इंजीनियरों को इंजीनियरिंग में उज्ज्वल भविष्य और जीवन में सफलता के गुर बताए। उन्होंने इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए माॅडल का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों से सवाल जवाब कर जानकारी ली। माॅडल में विद्यार्थियों ने अंचल के अनेक समस्यों के समाधान का तरीका निकाला है जिसे उन्होेंने सभी से साझा किया। अतिथियों ने विश्वविद्यालय में स्थापित प. दीनदयाल कौशल विकास केंद्र और रेडियों स्टेशन को भी देखा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव गौरव शुक्ला ने अतिथियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक  और इंजीनियरिंग के विद्यार्थी उपस्थित थे।

मानवीय अभियांत्रिकी को भी अपने जीवन में उतारें-झा

इस अवसर पर एसईसीएल के डायरेक्टर पर्सनल डाॅ. आर.एस झा ने इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी देश की प्रगति का आधार इंजीनियर होते हैं। इंजीनियरों के बिना किसी भी देश के विकास के कल्पना नहीं की जा सकती है। तकनीक कभी भी खत्म नहीं होती यह हमेशा आगे बढ़ती रहती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी महान इंजीनियर विश्वेश्वरैया और डाॅ.सी.वी.रामन् बने, लेकिन इसके साथ मानवीय अभियांत्रिकी को भी अपने जीवन में उतारें। मानवीय संवेदना और मानवीय मूल्य भी जीवन में बेहद जरूरी है।

इंजीनियरिंग के विद्यार्थी आधुनिक युग के ऋषि-प्रो.दुबे

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.आर.पी.दुबे ने कहा कि इंजीनियरिंग के विद्यार्थी आधुनिक युग के ऋषि हैं। जो मानव जीवन को सुखी बनाने में योगदान देंगें। प्रो. दुबे ने कहा कि इंजीनियरों के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए युवाओं के जीवन में यह धारणा नहीं होनी चाहिए कि इंजीनियर बनकर सिर्फ नौकरी ही नहीं करना है, उन पर पूरे समाज और देश की जिम्मेदारी है। उन्हें इस जिम्मेदारी को निभाने की मंशा से आगे बढ़ना चाहिए।

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