ट्राइकोडर्मा उत्पादन तकनीक पर सात दिवसीय कृषक प्रशिक्षण

मुंगेली -इंदिरा गॉधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, चातरखार मुंगेली द्वारा ग्राम चिल्फी में कृषक महिलाओं के लिए ट्राइकोडर्मा उत्पादन तकनीक पर कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिक श्रीमती नेहा सारथी के द्वारा ट्राइकोडर्मा उत्पादन तकनीक पर विस्तार पूर्वक प्रतिदिन चरणवार प्रायोगिक जानकारी दी गई। जिसमें मुख्य रूप से मातृ कल्चर उत्पादन एवं ट्राइकोडर्मा उत्पादन के बारे में जानकारी दी गई। ट्राइकोडर्मा उत्पादन का आर्थिक लाभ प्राप्त करने के विषय मे जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में उपस्थित महिलाओं को फिल्म के माध्यम से प्रदर्शन करके सजीव जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित वैज्ञानिक एस.के. लहरे द्वारा ट्राइकोडर्मा क्या है? किन-किन फसलों में उपयोग करना चाहिए एवं इसका वृहद रूप में उत्पादन कैसे किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी गई। ट्राइकोडर्मा पादप रोग प्रबंधन विशेष तौर पर मृदा जनित बीमारियों के नियंत्रण के लिए बहुत ही प्रभावशाली जैविक विधि हैं। ट्राइकोडर्मा एक कवक है यह लगभग सभी प्रकार के कृषि योग्य भूमि में पाया जाता है। ट्राइकोडर्मा का उपयोग मृदा जनित रोगो के नियंत्रण के लिए सफलता पूर्वक किया जा सकता है। ट्राइकोडर्मा के लाभ जैसे रोग नियंत्रण, पादप वृद्धि कारक एवं रोगो का जैव-रासायनिक नियंत्रण आदि ट्राइकोडर्मा सभी पौधे व सब्जियो जैसे बैंगन, टमाटर, मिर्च, आलू, मूंगफली, मटर, सोयाबीन, प्याज, तम्बाकू, हल्दी, फूलगोभी, कपास एवं राजमा आदि के लिए उपयोगी है।

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