अत्याचार,अन्याय व अधर्म ही अकाल का कारण-शैलेष पाण्डेय

०० गौ हत्या, किसानों की आत्महत्या, पेड़ों की कटाई व शिविरों में माताओं-बच्चों की हुई हत्या

०० अकाल और सूखा सरकार और मंत्रियों की करनी का फल

बिलासपुर। प्रदेश में अकाल और सूखा घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस नेता और आदित्य वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष शैलेष पाण्डेय ने कहा है, कि किसी भी देश व प्रदेश में आकाल तब पड़ता है, जब वहां अत्याचार,अन्याय और अधर्म चरम पर होता है। यही हाल छत्तीसगढ़ राज्य का हो चुका है। गौ हत्या, किसानों की आत्महत्या, पेड़ों की कटाई और सरकारी योजनाओं में माताओं-बच्चों की हत्या हुई है तो अकाल पड़ना तय है। जिस राज्य का राजा और मंत्री अत्याचार,अन्याय और अधर्म करता हो उसका फल वहां की प्रजा को भुगतना ही पड़ता है। सरकार अब गरीब किसानों को ढग कर करोड़ों रूपए का भ्रष्टाचार करने का रास्ता बना रही है।

शैलेष पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश में अकाल सरकार की करनी का फल है। गौ हत्या करके सरकार अधर्म के रास्ते पर चल रही है और यहां की गरीब किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इसलिए ही अकाल की स्थिति बनी है। किसानों को समय में न तो सुविधा दी गई और अधिकारियों ने समय रहते किसानों को सहयोग भी नहीं किया। अब सरकार एक नई तैयारी में है। सूखा के नाम पर गरीब किसानों के पैसे को सरकारी नुमांइदें डकारने की तैयारी में है। पाण्डेय ने बताया कि क्या एक दिन या एक सप्ताह में सूखे की स्थिति बन सकती है। ये 27 जिलों में से 15 जिले को भयंकर आकाल पड़ा है।  21 जिलों के 96 तहसील को सूखा ग्रस्त घोषित किया है, जबकि 6 जिले 90 फीसदी आकालग्रस्त घोषित किए गए हैं। सवाल तो यह है कि इतनों दिनों तक सरकार का उच्च स्तरीय और मैदानी अमला क्या कर रहा था। पाण्डेय कहा कि समय रहते फसल को बेहतर करने के लिए काम किया होता तो ये स्थिति नहीं होती। पाण्डेय ने कहा कि कागजी दावों के आधार पर एक साल पहले सरकार कृषक कर्मण पुरस्कार ले आती है और देश भर में ढ़िढोरा पीटा जाता है,  और दूसरे ही साल सूखा घोषित किया जाता है। सरकार खेतों में सिचाई की स्थाई व्यवस्था क्यों नहीं कर पा रही है। किसानों को लाभ देने के लिए करोड़ों रूपए की योजना तैयार कर बंदरबांट किया जा रहा है, लेकिन किसानों को उनकी खेती के लिए आत्मनिर्भर बनाने कोई प्रयास नहीं है। इस मामले में सरकार को जांच समिति गठित कर जांच करनी चाहिए। इसके बाद सचिव से लेकर जिला स्तर पर कृषि संचालक तक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई का संदेश गरीब किसानों तक जाए।

 

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