शिक्षक दिवस के दिन शिक्षकों को आंदोलन के बाध्य होना दुखद : कांग्रेस

रायपुर| भारतीय जनता पार्टी की सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा और शिक्षक है ही नही। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया सचिव सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रदेश के लिए इससे दुर्भाग्य जनक और क्या हो सकता है कि शिक्षक दिवस के दिन राज्य के लगभग आधे से अधिक शिक्षक हड़ताल पर जाने को मजबूर थे। प्रदेश के सभी शिक्षा कर्मी एक दिन का सामूहिक अवकाश ले कर आंदोलनरत रहे। इसी दिन राज्य भर के अनुदान प्राप्त शिक्षक शिक्षक दिवस के दिन से ही अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए। लम्बे अर्से से अनुदान प्राप्त शिक्षक नियुक्ति करन और शिक्षा कर्मी अपने संविलियन और नियमित वेतन देने की मांग कर रहे है।

भाजपा सरकार शिक्षा कर्मियों को नियमित वेतन नही देती, उन्हें तीन से चार महीने वेतन पाने का इंतजार करना पड़ता है। पीड़ा जनक स्थिति तो तब बन जाती है जब राज्य के मुख्य मंत्री को सरकार चलाते 13 साल हो जाने के बाद यह पता चलता है कि उनके राज में शिक्षकों को तीन चार महीने वेतन ही नही मिलता। जबकि समय पर वेतन न मिल पाने के कारण बस्तर में एक शिक्षा कर्मी ने आत्म हत्या कर लिया था। शिक्षाकर्मी वेतन समय पर न मिलने के कारण बड़े मुश्किल से अपना घर चला पा रहे। सरकार भूखे शिक्षकों के दम पर राज्य की आने वाली पीढ़ी का भविष्य  बनाना चाह रही है। मुख्यमंत्री का शिक्षा कर्मियों के वेतन बिलम्ब से मिलने पर  की गई स्वीकारोक्ति के बाद यह कहना कि जब बाकी विभाग के लोगो को 1 तारीख को वेतन मिलता है तब शिक्षाकर्मियों को क्यो नही मिलता? उनको भी मिलना चाहिए। आखिर शिक्षा कर्मियों को वेतन क्यो नही मिलता इसका मुख्यमंत्री और सरकार से बेहतर जबाब कौन दे सकता है? वित्त, पंचायत और शिक्षा विभाग को समन्यवय बनाने के जो आदेश अभी दिए गए वह पहले क्यो नही दिए गए? भाजपा के लिए किसानों के समान शिक्षक भी सिर्फ चुनावी नजरिये से उपयोगी है इसीलिए सरकार को इनका ध्यान चुनाव के पहले ही आता है। सरकार ने देर से ही शिक्षा कर्मियों को हर माह समय पर वेतन देने की जो बात कही है उस पर तुरन्त अमल शुरू किया जाय।

 

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