रेलवे टिकट से लेकर कहीं भी नहीं चलते 10 के सिक्के

०० सरकार के नियमों की खुले आम उड़ रही धज्जियां, आमजनता को होती है रोजाना परेशानी

 रायपुर।10 के सिक्कों को लेकर भ्रम मानें या सरकार के नियमों का अपनी सहूलियत के लिए उल्लंघन, इसमें ज्यादा अंतर नही है। रेलवे बस टिकट हो या ऑटो में सफर, रोजमर्रा की चीजें खरीदनी हो, वाहन में पेट्रोल डलवाना हो या आकस्मिक उपचार कराना हो अपनी सुविधा के लिए सभी जगह 10 के सिक्के को बंद कर दिया है।

दस रूपए के सिक्कों के लेकर लोगों की परेशानी कम होने का नाम नही ले रही। बैंकों में भी इन सिक्को को अपना पल्ला झाड़ रहा है और गिनने की फजियत के चलते इसे लेना पसंद नही आ रहा है। लेकिन उन आम जनता का क्या जो नोटबन्दी का दंश झेलकर अपनी छोटी छोटी रकम को कागज का टुकड़ा बनते देखी है और अब 10 के सिक्के भी जो अपने पास बचा कर रखें हैं उनका चलन ही बंद किया जा रहा है। सरकार की नोटबन्दी से किसे लाभ हुआ नही हुआ इसका पता तो चल ही गया केवल एक प्रतिशत चलन वाला रुपया नही आया जबकि लगभग 99 प्रतिशत रुपया बैंक में वापस आ गया। ऐसा कैसे हुआ सरकार ही बताये। जिस पर विपक्षी दल के तेवर गर्म नज़र आ रहे हैं।ऐसा ही एक मामला राजधानी रायपुर के अनारक्षित टिकट काउंटर में सामने आया। जब एक यात्री 5 नंबर प्लेटफार्म के पीछे स्थित टिकट काउंटर से रायपुर से पेंड्रारोड का टिकट लेने पहुंचा और 10 – 10 के सिक्के दिए। जिसे लेने से काउंटर में बैठे लिपिक बाबू ने उन सिक्कों के लेने से साफ इंकार कर दिया इस पर यात्री ने सिक्के न लेने के  लिए जवाब तलब किया उतने में बाबू उखड़ गए और यात्री को अनाबशनाप कहने लगे। यात्री को रेल से यात्रा करनी थी तो उसने बहस करने में समझदारी न समझते हुए नोट देकर टिकट खरीदी। इस सब घटनाक्रम पर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए एक व्यक्ति ने इसका वीडियो बना लिया और उसे वाइरल कर दिया। आप भी देखें उस रेलवे काउंटर में बैठे बाबू ने किस तरह का व्यवहार यात्री से किया।

वाइरल विडियो में रेलवे टिकट पर लिपिक कर रहा यात्री से बहस:- रेलवे काउंटर में हुई इस घटना में यात्री से 10 सिक्के को देना कितना बड़ा अपराध हुआ जो काउंटर के लिपिक बाबू ने उसे बत्तमीजी कर चलता कर दिया। ऐसे ही वाकये आये दिन होते हैं जिसमे आम जनता को परेशानी और जिल्लत झेलनी पड़ती है। क्या उस लिपिक का व्यवहार अव्यवहारिक और गैरकानूनी नही है? क्या 10 के सिक्के को कहीं भी मुद्रा के रूप में चालाना गैरकानूनी है? क्या लोगों को आये दिन होने वाली परेशानियों का सरकार से कोई सरोकार नही है? क्या रेलवे प्रशासन को इस घटना से सबक लेकर गैरजिम्मेदाराना हरकत करने वाले उस लिपिक को दंड नही देना चाहिए?

रिजर्व बैंक का है स्पष्ट निर्देश:- आम जनता की परेशानी का सबब बने इन 10 के सिक्कों के प्रति फैले भ्रम को आरबीआई ने कई बार स्पष्ट किया है। आरबीआई के कहना है 10 के सभी सिक्के चल रहे हैं गाइडलाइन के अनुसार राष्ट्रीय रुपया को लेन देन से बिना आदेश निकलना उसे लेने से इनकार करने अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद अपनी मनमानी करते हुए इसे लेने से इनकार किया जाता है जिस पर आम जनता से बहस बाजी की जाती है और उन्हें बेइज्जत करते हुए भगा दिया जाता है।

 

 

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