जिला सहकारी बैंक में करोडो का भष्टाचार, पूर्व कलेक्टर ने की थी भ्रष्टाचार की पुष्टि

०० तीन हजार के तरपोलिन को सात हजार में सप्लाई कर वसूल गया मोटा कमीशन

०० तत्कालीन कलेक्टर अम्बलगंन पी. ने किया था तारपोलिन भ्रष्टाचार की पुष्टि

बिलासपुर| जिला सहकारी बैंक के सीईओ अभिषेक तिवारी द्वारा बिलासपुर सहकारी बैंक में पदस्थापना के बाद से लगातार भ्रष्टाचार के नित नए कारंमानो को अंजाम देकर करोडो का घोटाला किया है| वर्ष 2015 में धान उपार्जन केन्द्रो में दोगुने दाम पर तरपोलिन सप्लाई का मामला सामने आया था जिसकी पुष्टि तत्कालीन कलेक्टर अम्बलगंन पी. ने किया था, जिसके बाद कलेक्टर द्वारा अभिषेक तिवारी को नोटिस जारी किया गया, किन्तु कुछ समय के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस फर्जीवाड़े में तीन हजार के तरपोलिन को सात हजार में सप्लाई कर मोटा कमीशन वसूल गया, इसी प्रकार धान का मॉइस्चर मापन के नाम पर लाखो रुपये का मॉइस्चर मीटर समितियों में सप्लाई कराया गया, इसमें भी मोटी कमीशन का बंदरबाट हुआ।

सीईओ अभिषेक तिवारी द्वारा धान का मॉइस्चर मापन के नाम पर लाखो रुपये का मॉइस्चर मीटर समितियों में सप्लाई की गयी थी समितियों द्वारा बार बार शिकायत करने के बाद भी कोई कायवाही नहीं की गई, यहाँ तक की अपैक्स बैंक के चेयरमैन अशोक बजाज से शिकायत किया गया, किन्तु जाँच के नाम पर लीपापोती कर दी गई, क्योकि बाद में अभिषेक तिवारी तथा कांतिलाल धरगवे द्वारा समितियों को जबरदस्ती मौखिक आदेश कर पिछले तिथि में समिति से प्रस्ताव तैयार कराकर यह दिखने का प्रयत्न किया गया की तरपोलिन तथा मॉइस्चर मीटर समिति द्वारा खरीदी की गई है, वर्त्तमान में भी यदि समिति के दस्तावेज को खंगाला जाता है, तो स्पस्ट हो जावेगा की तरपोलिन तथा मॉइस्चर मीटर की खरीदी खरीदी में बैंक द्वारा कराया गया है। कांतिलाल धरगवे, सहायक पंजीयक सहकारी समिति द्वारा सभी समितियों में घूम घूम मौखिक आदेश देते हुए भस्टाचार को दबाने के लिए पुर जोर तरीके से रिकार्ड पूर्ण कराने का प्रयत्न किया गया। यथा बैंक के सभी शाखाओ में घूम घूम कर अवैधानिक राशि की वसूली की गई, जिसकी तस्दीक किसी भी ब्रांच के कर्मचारी से किया जा सकता है। जिन ब्रांचों द्वारा मनमाफिक राशि नही दी गई उनका ट्रान्सफर अभिषेक तिवारी द्वारा कर दिया गया। भयभीत कर्मचारी मनमाफिक राशि भी दिए तथा कांतिलाल के मंशाहारी खानपान का व्यवस्था भी किये।इस प्रकार अभिषेक तिवारी, कांतिलाल धरगवे के जुगलबंदी से खुलमखुला भष्टाचार दो सालो से निरंतर जारी है। दर्जनों शिकायत करने तथा शिकायत प्रमाणित होना के बाद भी दोनों अभयदान प्राप्त किये हुए है। बैंक में कांतिलाल धरगवे तथा अभिषेक तिवारी एवं कलेक्टर बिलासपुर का तीन सदस्यी संचालक मंडल है। जो बैंक के संचालन तथा नीतिगत निर्णय लेने के लिए उत्तरदायित्व है। पूर्व कलेक्टर द्वारा बैंक के सभी कार्य के लिए इन दिनों को मौखिक रूप से अधिकृत कर दिया गया था, संचालक मंडल, स्टाप उप समिति की अधिकाश बैठक केवल फॉरमैलिटी के लिए किया जाता था। बैठक के महीनो बाद मिनिट्स बुक में हस्ताक्षर होता रहा है। जरुरत के हिसाब से अभिषेक तिवारी मिनिट्स तैयार कर लिया करते जिसमे बिना चर्चा के हस्ताक्षर हो जाया करता था। बैंक में इन बैठको की मिनिट्स बुक में क्या निर्णय हुआ आज दो साल में कोई नही जनता आज भी गहेगाभाये मिनिट्स बुक में सुधार जारी है। जिसका प्रमाण 09/08/2017 को 60 कर्मचारी जारी कारण बताओ सूचना पत्र से मिला है, यथा 06/02/2017 को हुए स्टाप उप समिति का हवाला देकर छः महीने बाद नोटिस जारी किया है। जबकि माह मई में पुनः बैठक हुई इस प्रकार समझा जा सकता है की अभिषेक तिवारी का किस प्रकार एकाधिकार बैंक के नीतिगत निर्णय तथा कार्य पर है।एकाधिकार होने से प्रतिफल के रूप अभिषेक तिवारी कर्मचारियों में दबाव बनाकर व्यापक भष्टाचार कर लूट जारी है। उल्लेखनीय है की समिति में जो भी खरीदी होना किया जाना है वह भी छत्तीसगढ़ शाशन द्वारा जारी क्रय अधिनियम अनुसार किया जाना है। जिसमे कोटेशन अथवा टेंडर बुलाकर खरीदी होनी जो नही किया गया है।

 वर्तमान कलेक्टर पी.दयानंद से भयभीत है अभिषेक तिवारी :- वर्तमान कलेक्टर पी दयानंद की छवि साफ होने के साथ पारदर्शी होने पर अभिषेक तिवारी थोडा झिझक है क्योकि कोरबा कलेक्टर होते हुए इनके क्रियाकलाप से परिचित है, परन्तु किसी प्रकार का पोल कलेक्टर के समक्ष न खुल जाये इसे लेकर कर्मचारियों के ऊपर भयंकर दबाव अभिषेक तिवारी द्वारा बनाया गया है, जबकि कर्मचारियों को नये कलेक्टर से बहुत उम्मीद है, बैंक तथा कर्मचारियों में भय का माहौल को ख़तम करने में नए कलेक्टर सफल होंगे।

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