खेती-किसानी में युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी आल्हादित करती है: डॉ. रमन सिंह

०० मुख्यमंत्री ने युवा किसान उद्यमी कार्यशाला को किया संबोधित

०० समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की बेहतर प्रणाली बनाने वाला छत्तीसगढ़ इकलौता राज्य

 रायपुर| मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में खेती-किसानी के प्रति बढ़ती दिलचस्पी आल्हादित करती है। मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हमारे बहुत से युवा आईएएस, आईपीएस जैसी  सरकारी नौकरी और बड़े-बड़े पैकेज वाली निजी क्षेत्र की नौकरियां छोड़कर दूरस्थ अंचलों में खेती से जुड़ रहे हैं। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय और 30 कृषि महाविद्यालयों में सारी सीटें पहली काउंसिलिंग में ही भर जाती हैं। मुख्यमंत्री आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित दो दिवसीय युवा किसान उद्यमी कार्यशाला के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’नये भारत के निर्माण संकल्प से सिद्धि अभियान’ के तहत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय,कृषि विज्ञान केंद,्र छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग और भारतीय किसान संघ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस ने की। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री देवजी भाई पटेल और अखिल भारतीय किसान संघ के श्री दिनेश कुलकर्णी विशेष अतिथि के रूप में समारोह में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा तैयार जिलेवार रणनीति की पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने राज्य के प्रगतिशील किसानों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक उद्यमियों के लिए राज्य सरकार और भी बेहतर नीति तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में अकेला राज्य है जो किसानों से सहकारी समितियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी करता है। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर किसानों सहित उपस्थित कृषि विशेषज्ञों और नागरिकों को वर्ष 2022 तक कृषि आय दोगुनी करने, जैविक खेती और उच्च पैदावार वाले बीज अपनाने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने, कृषि उत्पादों के सुरक्षित भंडारण और उन्हें अच्छा बाजार दिलाने के लिए कार्य करने का संकल्प दिलाया। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि खेती करने वाले किसान सबसे बड़े विशेषज्ञ है। आज दंतेवाड़ा, बीजापुर, जशपुर और सूरजपुर क्षेत्र के छोटे-छोटे किसान आधुनिक तरीके से खेती करके अच्छी पैदावार ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के किसानों के प्रयासों से आज छत्तीसगढ़ उन्नत बीजों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। सहकारी बैंकों से किसानों द्वारा पहले लगभग तीन सौ करोड़ रुपए का कृषि ऋण लिया जाता था, यह राशि अब बढ़कर 35 सौ करोड़ रुपए हो गई है। प्रदेश में सिंचाई पंपों की संख्या बढ़कर चार लाख से अधिक हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश में लगभग तीन लाख 60 हजार वन अधिकार पत्र वितरित किए हैं। इस भूमि को विकसित करने के लिए मनरेगा के माध्यम से सहायता दी गई है। साथ ही वन अधिकार पत्रधारियों को खेती के लिए सहकारी बैंकों से ऋण सहित बीज और सिंचाई पंप भी दिलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर, सरगुजा क्षेत्र लघु वनोपजों से वनवासी क्षेत्र के लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकेले धान की खेती से ही सब कुछ करना संभव नहीं है। किसानों को कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मछलीपालन, दुग्ध उत्पादन, उद्यानिकी की गतिविधियों को भी अपनाना होगा। लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि कृषि को उद्योग का दर्जा दिया जाना चाहिए, कृषि क्षेत्र में नए लोगों को प्रोत्साहित करने और कृषि उत्पादों की अच्छी मार्केटिंग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। उनका यह प्रयास है कि देश की जनता की आर्थिक स्थिति अच्छी हो और संपन्नता आए।

भारतीय किसान संघ के श्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसानों को उत्पादन के साथ-साथ कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण की तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से कृषि के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसान छोटे-छोटे समूहों में संगठित होकर और प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना की मदद लेकर कृषि और कृषि से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार कर सकते हैं। इंदिरा कृषि विवि के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस.के. पाटिल ने कहा कि प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों ने ऐसे कृषि प्रादर्श विकसित किए हैं जिनके माध्यम से दो से तीन वर्षों में कृषि आय दो से तीन गुना की जा सकती है। इन प्रादर्शों को प्रदेश के सभी 27 जिलों के किसानों तक ले जाने का प्रयास किए जा रहे हैं।उन्होंने कृषि आय दोगुनी करने के लिए खेतों में डबरी और छोटे कुए के माध्यम से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। ड्रिप सिंचाई अपनाने, उद्यानिकी पशुपालन, मछली पालन, खाद्य प्रसंस्करण की गतिविधियों से जुडने और किसानों को संगठित होकर बाजार से जुडने की जरूरत बताई। इस अवसर पर कृषि विशेषज्ञ और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

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