उधार के महापुरूष की अपेक्षा स्थानीय महापुरूषों को दें प्राथमिकताः अजीत जोगी

रायपुर| छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ विधान सभा में भारतीय संसद के सेंट्रल हाॅल की तर्ज पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमा लगाये जाने के निर्णय का छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी ने स्वागत करते हुए कहा कि महापुरूषों की प्रतिमायें अवश्य लगें किन्तु प्राथमिकता छत्तीसगढ़ के महापुरूषों को ही दी जानी चाहिए।

छत्तीसगढ़ के समृद्ध इतिहास में ऐसे अनेकों महापुरूष हैं जिनकी गौरव गाथा अंग्रेजों व सामंतों के विरूद्ध लड़ी गई लड़ाई किसी अन्य इतिहास पुरूष से कम नहीं है। अतः ऐसे छत्तीसगढ़ गौरव महापुरूषों जिसमें सर्वश्री शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गेंदसिंह, शहीद गुण्डाधुर, पं. सुन्दरलाल शर्मा, खूबचंद बघेल, ठा. प्यारेलाल सिंह, बेैरिस्टर छेदीलाल, डाॅ. रत्नाकर झा, वामनराव लाखे, लाल कलिन्दर सिंह, रानी स्वर्णकुंवर देवी, स्व . मिनीमाता ,महंत लक्ष्मीनारायण दास, माधवराव सप्रे, मौलाना अब्दुल रऊफ खान (महेबी), नारायण राव मेघावाले, यति यतनलाल, डाॅ.राधाबाई, परसराम सोनी और सुधीर मुखर्जी जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की अलख तो छत्तीसगढ़ में जगाई किन्तु स्वाधीनता के बाद के सत्ताधीशों ने छत्तीसगढ़ के प्रति शोषण की मानसिकता मे ऐसे महापुरूषों को न योग्य सम्मान दिया ना उनके प्रति कृत्ज्ञता व्यक्त की। पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी ने कहा कि कोई राष्ट्र या राज्य उधार के महापुरूषो से अपनी संस्कृति या इतिहास को समृद्ध नहीं बना सकते और ना ही उस आधार पर अपने को गौरान्वित महसूस कर सकते हैं बल्कि अपने अंचल के महापुरूषों को सम्मान देकर ही अपने प्रदेश के युवा व नई पौध को उस गौरव गाथा के आधार पर अपनी संस्कृृति व संस्कार प्रदान कर सकते हैं।

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