भ्रष्ट पशु अधिकारियों पर रमन सरकार की पकड़ कमजोर : गौ सेवक प्रबधक

रायपुर| रमन सरकार की भ्रष्ट पशु अधिकारियों पर पकड़ कमजोर है उन पर कार्रवाई करने में राज्य सरकार के हाथ-पांव फुल रहे हैं। इस वजह से निर्दोष लोग सजा पा रहे हैं। भाजपा सरकार में गौ सेवा का बुरा हाल है ये बातें गौ सेवा प्रबंधकों ने 26 अगस्त को प्रेस कांफ्रेंस में कहीं।

गौ सेवा प्रबंधकों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 15 सालों से अनुदान प्राप्त गौ शालाओं का भी अनुदान बंद कर दिया गया है। अनुदान मांगने पर कहा जाता है कि तुम जानो, हमसे पूछकर संस्था नहीं बनाई है। कमीशन नहीं दिया जाता है तो संस्था का पंजीयन रद्द करने की धमकी दी जाती है। तीन नंबर वाला छत्तीसगढ़ में खाना पद्धति का पोषाहार दिया जाए। यह संभवन नहीं है। बता दें कि राजपुर गौ शाला में गायों की मौत के बाद यह प्रेस कॉन्फ्रेंस लिया गया। इसमें कमीशनखोरी को लेकर राज्य सरकार पर जमकर हमला किया गया। मार्च 2014 के बाद अनुदान नहीं दिया गया है। अधिकारी छत्तीसगढ़ लोक आयोग की भी बातें भी नहीं सुन रहे हैं। भ्रष्ट अधिकारी, डॉक्टर उईके व उनके साथियों पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई। आगरा के बाद कोई भी त्वरित कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार की निरंकुशता से अधिकारी निष्क्रिय हैं।गौरतलब है कि दुर्ग जिले की गौशाला में चारा-पानी के अभाव में सैकड़ों गायों की मौत की घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। वहीं राजधानी सहित रायपुर जिले की 7 से अधिक गौशालाओं की जांच दो दिन के भीतर पूरी कर ली गई है। जांच में अफसरों को किसी भी गौशाला में कोई बड़ी खामी नजर नहीं आई। कुछ गौशालाओं में मात्र कीचड़ तो कहीं पानी निकासी की व्यवस्था ठीक नहीं पाई गई। गौशाला में गायों के मरने की घटना को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश की सभी गौशालाओं की जांच कराने के आदेश दिए थे। पशु विकास विभाग और गोसेवा आयोग सहित गौशाला संचालकों में हड़कंप मच गया। रायपुर जिले में अफसरों की जांच टीम अपने-अपने क्षेत्रों की गौशालाओं में पहुंची। संयुक्त संचालक पशु विकास विभाग के अनुसार रायपुर जिले में सात गौशालाएं पंजीकृत हैं। गौशालाओं की जांच दो दिन के अंदर कराए जाने का दावा किया गया। शहर की दो बड़ी गौशालाएं महावीर गोसेवा संस्थान और बंजारीधाम उज्ज्वल गोरक्षण केंद्र की जांच करने खुद विभाग की संयुक्त संचालक अंजना नायडू और अतिरिक्त तहसीलदार उमेश साहू पशु चिकित्सक को लेकर पहुंचे।

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