47 पुलिसकर्मियों की जबरन सेवानिवृत्ति पर सर्वसमाज में आक्रोश 

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की ओर से 47 पुलिसकर्मियों को जबरिया सेवानिवृत्त के आदेश जारी किए गए है। इसमें सेवानिवृत्त हुए पुलिसकर्मियों में अनुसूचित जाति जन जाति और पिछड़ा वर्ग के अधिकारी और कर्मचारी पुलिस शामिल है। सेवानिवृत्ति संबंध में गोंडवाना गोंड महासभा, सर्व आदिवासी समाज, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा सहित अन्य वर्ग और समाज इससे आक्रोशित है।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने बुधवार को एकपत्रकारवार्ता में बताया कि, पुलिस विभाग में अचानक एक तरफा कार्रवाई करते हुए 47 पुलिसकर्मियों का बर्खाश्त करना देश के लिए अच्छा सन्देश नहीं है। युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना और बिना कारण बताए नोटिस को लोकहित बता कर जबरदस्ती सेवानिवृत्त किया गया है। साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद का भी उल्लंघन किया गया है। इस दौरान रिटायर्ड आईएएस शिशुपाल सोरी और रिटायर्ड आईएएस नवल सिंह मंडावी ने भी बताया कि, विभाग में कई वर्ग के अधिकारी कर्मचारी अभी कार्यरत है, जिनके विरुद्ध कदाचरण और शारीरिक अक्षमता होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई है। इसके अलावा 40 अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्ट्राचार और अपराधिक कृत्य के मामले दर्ज हैं, जिस पर भी न्यायिक रूप से कार्रवाई नहीं की गई है। इसी प्रकार नियम और कानून के प्रति सर्वसमाज 27 अगस्त को रायपुर में एक बैठक करेंगी, और आगे अन्य बातों के लिए रणनीतियां बनाएगी। सर्वसमाज ने इस सेवा बर्खाश्तगी के लिए खिलाफ राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग भारत सरकार, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री से मांग की है कि, समिति के नामित अधिकारियों के विरूद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही करें। साथ ही अनिवार्य सेवानिवृत्त 47 पुलिसकर्मियों को पुन: सेवा में बहाल किया जाएं।

 

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