संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर फैसला अब कल

बिलासपुर । संसदीय सचिवों की नियुक्ती के मामले में फैसले की घड़ी लंबी हो गई है। बुधवार को इस मामले पर फैसला नहीं आ सका। चीफ जस्टिस के बुधवार को कोर्ट ना आने की वजह से ये सुनवाई टल गई उम्मीद है कि इस मामले में गुरुवार को फैसला आ सकता है।

शिवशंकर पैंकरा, लखन देवांगन, तोखन साहू, राजूसिंह क्षत्री, अंबेश जांगडे, रूपकुमारी चाैधरी, गोवर्धन सिंह मांझी, लाभचंद बाफना,मोती राम चंद्रवंशी, चंपादेवी पावले, सुनीति सत्यानंद राठिया के संसदीय सचिव रहने और ना रहने को लेकर ही बुधवार को फैसला आना था। इससे पहले कोर्ट ने एक अगस्त को अपने फैसले में संसदीय सचिवों के अधिकारों पर रोक लगा थी।हाईकोर्ट में याचिका में कहा गया था कि संसदीय सचिवों की नियुक्तियों का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। इनकी नियुक्ति नियम विरुद्ध की गई है। राज्य के सभी संसदीय सचिव ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे में आते हैं, लिहाजा उन्हें अयोग्य घोषित कर हटाया जाए।गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी एक फैसले में कहा है अगर किसी सांसद या विधायक ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का पद लिया है, तो उसे अपनी सदस्यता गंवानी होगी। सरकार मध्य प्रदेश में 1967 के 1 नियम के आधार पर उनकी नियुक्ति को वैध ठहराती है, जबकि वह नियम राज्य मंत्रियों के लिए था। वहीं मध्यप्रदेश के नियम छत्तीसगढ़ सरकार पर लागू नहीं होते, क्योंकि इसके लिए सरकार ने कोई विधेयक पास नहीं कराया है।

 

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