केन्द्रीय सहकारी बैंक में पेट्रोल-डीजल के नाम पर हुआ करोड़ो का घोटाला

०० बैंक के वाहनों के अलावा किराये के वाहनों पर किया जा रहा करोडो खर्च

०० बैंक के सीईओ अभिषेक तिवारी के इशारों पर लगातार किया जा रहा फर्जीवाड़ा

बिलासपुर| केन्द्रीय सहकारी बैंक के सीईओ अभिषेक तिवारी का एक और घोटाला सामने आया, इस बार बड़े चतुराई से पुलिस पेट्रोल पम्प के सहायता से किया जा रहा घोटाला उजागर हुआ है।जिला सहकारी बैंक में बैंक के वाहन स्कार्पियो, सफारी, सफारी डाकोर एवं इन्नोवा वाहन में डीज़ल भराने के लिए एक कूपन काटकर पुलिस ग्राउंड में स्थित पुलिस पेट्रोल पम्प में डीज़ल भराते है। लेकिन बैंक के वाहनों के अलावा किराया के वाहनों में भी डीज़ल भराया जा रहा है। यह फर्जीवाडा में पुलिस पेट्रोल पम्प की मिलीभगत से किया जा रहा है बैंक में चल रहे किराये के वाहन में डीज़ल भराने के लिए बिना कूपन जारी किये डीज़ल दिया जा रहा है जो पेट्रोल पम्प के बिल से दिखाई पड़ रहा है।

बैंक में धान खरीदी समय शीलक व्यवस्था तथा मानिटरिंग के नाम पर 18 वाहन मासिक/देनिक किराये पर लिए जाते है जिसके लाखो रुपये का भुगतान बैंक द्वारा किया गया है।विभिन्न शाखाओ में प्रधान कार्यालय के मोखिक आदेश पर अलग अलग दर पर किराये के वाहन का भष्टाचार रूपी खेल अभिषेक तिवारी के इशारो पर चल रहा है। क्योकि इन वाहनों के मालिको के किराया भुगतान में मोटा कमीशन अभिषेक तिवारी को जाता है। बैंक में वाहन प्रभारी के पद पर एक चपसरी धर्मेन्द्र साहू को बिठाये हुए है, जो की वाहन की व्यवस्था से लेकर बिल प्राप्त कर बिल का भुगतान कराकर मोटी कमीशन वाहन मालिको से वसूल कर सीईओ अभिषेक तिवारी को देता है जबकि वाहन प्रभारी की जवाबदारी किसी शाखा प्रबंधक के पद के अधिकारी को देना होता है।वाहन में डीज़ल भराने के इस भष्टाचार में देवनारायण शर्मा लेखा प्रभारी तथा स्थापना प्रभारी का महत्वपूर्ण योगदान है क्योकि इनके ही हस्ताक्षर से विभिन्न वाहनों में डीज़ल भराने को टोकन जारी होता है।  ये वही देवनारायण शर्मा जो एक करोड़ तेतीस लाख के रिजर्व बैंक को पटाये गए पेनाल्टी के आरोपी अधिकारी है। तथा पामगढ़ ब्रांच मैनेज़र रहते तीन करोड़ के फर्जी ऋण वितरण किसानो के नाम पर किया है। जिसमे दो सस्था प्रबंधक सहित देवनारायण शर्मा को न्यायलय उपपंजीयक जांजगीर-चाम्पा में दोषी पाया है।बैंक के वाहन तथा किराये के वाहन में लाखो रुपये के भष्टाचार अब भी जारी है। अभिषेक तिवारी पर राजनितिक रसूख के कारण अभी तक कोई कार्यवाही नही किया गया है जबकि दर्जनों शिकायत हुआ तथा प्रमाणित भी पाया गया है। इन सब में शासन की तरफ से बैंक के संचालक मंडल में शामिल श्री कांतिलाल धरगवे, सयुक्क्त पंजीयक बिलासपुर की क्रियाविधि भी संदेह के दायरे में है क्योकि इन तथ्यों के जानकारी के बाद भी भष्टाचार में खुलकर हाथ बटा रहे है।भष्टाचार के अगले अंक में अभिषेक तिवारी तथा कांतिलाल धरगावे ने किस प्रकार बिलासपुर के पूर्व कलेक्टर एवं बैंक के पूर्व प्राधिकृत अधिकारी अम्ब्लगन पी. को प्रभावित कर गड़बड़ी करने को प्रकाशित करेगे।

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