जबर गोहार आंदोलन के बाद  हरकत में आये फैक्टरी प्रबंधन, मांगे पुरी काम पर लौटे मजदूर

०० डेढ़ माह बाद प्रबंधन ने दस मांगो पर लिखित मंजूरी दी, सात मजदूरों को वापस लिया

०० क्रान्ति सेना तथा मजदूर ग्रामीणों के लगातार आंदोलन से कंपनी मालिक ने माना अपनी गलती

 रायपुर/धरसींवा| मोहंदी के देवी स्पंज आयरन मे आखिरकार डेढ़ महीने लंबे अंतराल के बाद प्रबंधन को अपनी गलतियां माननी पड़ी। ज्ञात हो कि धरसीवां के मोहदी स्थित देवी आयरन कंपनी में महिला मजदूरों से छेड़छाड़ की घटना हुई थी जिसमें दूसरे प्रदेश से छत्तीसगढ़ आकर नौकरी कर रहे अफसरों की संलिप्तता थी। इस घटना के विरोध में जब क्षेत्रीय मजदूर लामबंद हुए तब फैक्ट्री प्रबंधन ने बाहर से डेढ़ सौ गुंडे बुलाकर श्रमिकों को पिटवाया था। विरोध स्वरूप विगत पैंतालीस दिनों से फैक्ट्री बंद थी। श्रमिक अपने दस सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बैनर तले आंदोलन कर रहे थे। मजदूरों के जबर आंदोलन से विचलित होकर कुछ राजनैतिक जनप्रतिनिधि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से फैक्ट्री प्रबंधन के पक्ष में खड़े हो गये।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के शीर्ष नेतृत्व अमित बघेल, गिरधर साहू एवं रामगुलाम ठाकुर को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेज दिया गया। शायद उनकी सोच यह रही हो कि बड़े नेताओं के जेल जाने से यह आंदोलन टूट जाएगा लेकिन पीड़ित मजदूर अपनी रोजी-रोटी की परवाह किये बिना क्रांति सेना के नेतृत्व में लगातार आंदोलन करते रहे। अंततः बढ़ते घाटे को देखते हुए कंपनी के वास्तविक मालिक राजेश अग्रवाल ने मजदूरों से माफी मांग ली। साथ ही उक्त घटना को आंजाम देने वाले तत्कालीन प्रबंधन को हटा दिया और स्वयं कंपनी संचालित करने की बात कही। निकाले गये सातों मजदूरों को वापस काम पर रखने के अलावा घायल मजदूरों को उचित ईलाज और मुआवजा देने, कंपनी के बंद रहने की अवधि का वेतन देने सहित अन्य दस मांगों पर भी लिखित रुप से सहमति दे दी है।इस दौरान श्रमिकों के साथ छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय रुप से मांगें मनवाने के लिये डटे रहे। देवी कंपनी के श्रमिकों एवं आसपास के ग्रामीणों ने पीड़ित महिलाओं और शोषित मजदूरों के दुःख दर्द के समय अपने साथ खड़े होने के लिये आभार माना। श्रमिक हित में जेल जाने से भी नहीं कतराने वाले संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के सदस्यों को धन्यवाद दिया तथा दोषी कंपनी प्रबंधन का एकतरफा पक्ष लेने वाले भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों की कड़ी निंदा की है। ग्रामीणों का कहना था कि मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने वाले छत्तीसगढ़िया लोगों को जेल भेज कर डराने की नाकाम कोशिश करने वाले बाहरी नेताओं को क्षेत्र की जनता मुंहतोड़ जवाब देगी।

 

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