किसानों को मिलेगी हर प्रकार की मदद,खेतिहर श्रमिकों को मिलेगा रोजगार : रमन  

रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने निवास कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक लेकर राज्य में अल्पवर्षा से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि, संभावित सूखे की स्थिति में किसानों को हर प्रकार की मदद की जाएगी और खेतिहर श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर मनरेगा के तहत रोजगार की उचित व्यवस्था की जाएगी। अगर सूखे के कारण फसल प्रभावित होती है तो किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भी समुचित लाभ दिलाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को हर जिले में आपातकालीन कार्य योजना भी तैयार करने के निर्देश दिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि, सभी जिलों में पेयजल आपूर्ति का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए और जल उपयोगिता समितियों की बैठकें लेकर सिंचाई जलाशयों में जल भराव के अनुरूप किसानों को मांग के अनुसार खेती के लिए पानी दिया जाए। पेयजल के लिए हैण्डपम्पों का बेहतर रख-रखाव किया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव विवेक ढांड और अपर मुख्य सचिव एम.के. राउत सहित राजस्व और आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, कृषि, सहकारिता और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि,राज्य में चालू मानसून के दौरान विगत एक जून से आज 18 अगस्त तक की स्थिति में 677 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की गई है, जो विगत दस वर्षों की औसत बारिश की तुलना में दस प्रतिशत कम है। डॉ. सिंह ने राजस्व विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपात कालीन कार्य योजना तैयार करने और खरीफ फसलों का नजरी आंकलन तैयार कर 23 अगस्त तक भेजने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि, राज्य में धान की बोनी 99 प्रतिशत पूर्ण हो गई है और रोपाई के लिए लगभग 88 हजार हेक्टेयर शेष है, जो कि कुल रोपाई का 7 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने आज की बैठक में दो दिन पहले 16 अगस्त को राजस्व विभाग की ओर से सभी जिला कलेक्टरों को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि, फसलों को बचाने के लिए सिंचाई संसाधनों का समुचित उपयोग किया जाए। इसके साथ कम पानी से होने वाली वैकल्पिक फसलों के लिए बीजों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सिंचाई पम्पों के विद्युतीकरण, पशुचारे और रोजगारमूलक कार्यों की भी पर्याप्त व्यवस्था की जाए। सिंचाई के लिए बिजली की निरंतर आपूर्ति बनाए रखें। अगर अल्पवर्षा के कारण सूखे की स्थिति बनती है तो प्रभावित इलाकों में खेतिहर श्रमिकों को रोजगार देने के लिए मनरेगा के तहत अधिक से अधिक संख्या में कार्य शुरू किए जाएं।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि, राज्य में 85 वृहद, मध्यम और लघु सिंचाई योजनाएं हैं। अल्प वर्षा के कारण इनमें से 25 जलाशयों में 20 प्रतिशत से कम, 26 जलाशयों में 20 से 30 प्रतिशत, 15 जलाशयों में 30 से 40 प्रतिशत, सात जलाशयों में 40 से 60 प्रतिशत और 12 जलाशयों में 60 प्रतिशत से अधिक जल भराव है, लेकिन जलाशयों में जल स्तर क्षमता से कम है, फिर भी किसानों की मांग के अनुसार इन जलाशयों से उन्हें फसल बचाने के लिए पानी दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि, सभी जिलों में जिला जल उपयोगिता समितियों की बैठक आयोजित कर सिंचाई बांधों में जल भराव की समीक्षा की जाए और पानी की उपलब्धता के अनुसार किसानों को फसलों के लिए पानी दिया जाए। नदी-नालों में उपलब्ध पानी का भी डीजल पम्प आदि के जरिए सिंचाई के लिए उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विभाग की योजनाओं के तहत किसानों को डीजल पम्प, विद्युत पम्प, नलकूप आदि की सुविधा दी जाए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में 70 प्रतिशत और उससे कम बारिश वाले तहसीलों में फसलों की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि, प्रदेश के 27 में से 18 जिलों की 50 तहसीलों में अल्पवर्षा की स्थिति देखी जा रही है। इनमें 40 प्रतिशत से कम बारिश वाली दो तहसीले छुरिया और गुरूर शामिल हैं। 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक बारिश वाली तहसीलों की संख्या पांच है। इनमें रायपुर, बिलाईगढ़, जैजैपुर, धमधा और साजा शामिल हैं।
प्रदेश की 17 तहसीलों में अब तक 50 से 60 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है, इनमें बैकुण्ठपुर, धरमजयगढ़, आरंग, बलौदाबाजार, पलारी, कसडोल, मस्तुरी, लोरमी, बोड़ला, डोंगरगढ़, डोंगरगांव, दुर्ग, नवागढ़ (बेमेतरा), कुरूद, नगरी, भानुप्रतापपुर और दुर्गकोंदल सम्मिलित हैं। 60 से 70 प्रतिशत तक बारिश वाली तहसीलों की संख्या 26 है। इनमें खड़गवां, भरतपुर, बरमकेला, महासमुन्द, तिल्दा, सिमगा, गरियाबंद, राजिम, मैनपुर, बिल्हा, तखतपुर, पथरिया, राजनांदगांव, छुईखदान, खैरागढ़, बेमेतरा, बेरला, थानखम्हरिया, डौंडी, मगरलोड़, अंतागढ़, पखांजूर, नरहरपुर, नारायणपुर और बीजापुर शामिल हैं।
बैठक में जिलेवार वर्षा की समीक्षा के दौरान बताया गया कि ,प्रदेश में इस साल मानसून की बारिश 12 जून से शुरू हुई है। आज 18 अगस्त तक की स्थिति में दो जिलों-दुर्ग और बेमेतरा में 41 से 60 प्रतिशत, 11 जिलों-कोरिया, महासमुन्द, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, बिलासपुर, मुंगेली, राजनांदगांव, धमतरी, कांकेर और नारायणपुर में 61 से 80 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, जबकि 9 जिलों में सामान्य बारिश अर्थात 81 से 119 प्रतिशत बारिश हुई है, जिनमें रायगढ़, जांजगीर, कोरबा, कबीरधाम, बालोद, बस्तर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा और बीजापुर शामिल हैं। इनके अलावा 120 प्रतिशत से अधिक बारिश पांच जिलों – सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर और सुकमा में दर्ज की गई है।
बैठक में राजस्व विभाग के सचिव एन.के. खाखा, जल संसाधन विभाग के सचिव गणेश शंकर मिश्रा, सहकारिता विभाग के सचिव डी.डी. सिंह, राज्य विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालक अंकित आनंद, कृषि विभाग के संचालक एम.एस. केरकेट्टा और संचालक जनसम्पर्क राजेश सुकुमार टोप्पो सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

 

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