छत्तीसगढ़ में अन्य राज्यों से अधिक प्लास्टिक चावल की अफवाह : ऋचा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा प्लास्टिक चावल की अफवाह अधिक उड़ाई जा रही है। जबकि यहां जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में पीडीएस और खुले बाजार में कथित प्लास्टिक चावल का विक्रय नहीं पाया गया है। उक्त बातें प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं सचिव खाद्य विभाग एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ऋचा शर्मा ने कही।

नवीन विश्रामगृह के सभागृह में उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ में अब तक 96 स्थानों से सैम्पल लिए गए थे, जिसमें से 82 सैम्पल की रिपोर्ट आ गई है और शेष 14 की आनी बाकी है। जिन 82 सैम्पल की रिपोर्ट मिली है, किसी में भी प्लास्टिक चावल नहीं पाया गया। कच्चा और पक्का दोनों चावल की जांच की गई है। उन्होंने कहा कि, प्रदेश के जांजगीर-चांपा, कोरबा, दुर्ग, महासमुंद, जशपुर और कांकेर से कथित प्लास्टिक चावल विक्रय की सूचना मिली थी। जुलाई 2017 में जांजगीर के पामगढञ लोहरसी और तिलई तथा अकलतरा विकासखंड के किरारी गांव में मध्यान्ह भोजन योजना के चावल में प्लास्टिक चावल होने का संदेह तथा नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत भैंसदा, पामगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत ससहा की उचित मूल्य दुकान में प्लास्टिक चावल के वितरण करने की सूचना मिली थी। इसी तरह दुर्ग जिले के भिलाई की एक दुकान, महासमुंद के सरायपाली, कोरबा, जशपुर और राजनांदगांव के खुले बाजार में प्लास्टिक चावल बिकने की सूचना मिली थी। खाद्य औषधि प्रशासन की प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया और परीक्षण के बाद स्पष्ट हो गया कि, प्लास्टिक चावल नहीं है।
00 जांच के बिना स्वीकार नहीं किए जाते लाट : जैन
नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी सुनील जैन ने कहा कि, लाट जब तर स्वीकार नहीं किए जाते जब तक जांच नहीं होती है। भारत सरकार के निर्धारित मापदंड के आधार पर ही स्वीकृत होता है। छत्तीसगढ़ में 27 जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त है जो निरीक्षण कर जांच करते हैं। भारतीय खाद्य निगम का निर्देश है कि, क्वालिटी को देखकर जांच की जाए। भोपाल के अधिकारी भी छत्तीसगढ समय-समय पर आते हैं। अभी तक यहां प्लास्टिक और खराब क्वालिटी का चावल नहीं पाया गया है।
00 सुरक्षा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान : शुक्ला
स्टेट वेयर हाउसिंग कारॅपोरेशन लिमिटेड के एमडी एन.के.शुक्ला ने कहा कि, क्वालिटी इंस्पेक्टर क्वालिटी का निरीक्षण करते हैं। जमा चावल को सुरक्षित रखने और कीड़े से बचाने का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। साथ ही गुणवत्ता को बनाए रखने का भी पूरा ध्यान दिया जाता है। निर्धारित मापदंड के आधार पर क्वालिटी की जांच होती है।
00 छत्तीसगढ़ का चावल सबले बढिया : डॉ. सिंग
भारतीय खाद्य निगम के महाप्रबंधक डॉ. ओपी सिंग ने कहा कि, एफसीआई राज्य के लिए एजेंसी की तरह कार्य करती है। राज्य सरकार की मदद करती है। उन्होंने कहा कि, पिछले साल साढ़े 24 लाख मीट्रिक टन चावल छत्तीसगढ़ सरकार ने बेचा है, जिसमें से 21 लाख मीट्रिक टन चावल सिर्फ झारखंड, मध्यप्रदेश, केरला, तमिलनाडू, बिहार को बेचा है। सभी राज्यों से मिली प्रतिक्रिया में छत्तीसगढ़ के चावल को अच्छी क्वालिटी का दर्जा मिला है। सभी ने जहां तारीफ की वहीं चावल में प्लास्टिक तो क्या कीड़े तक नहीं मिले। इसलिए मैं भी यही कहूंगा कि, जैसे छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा ठीक वैसे ही छत्तीसगढ़ का चावल सबले बढिय़ा। जितनी भी अफवाहे फैल रही है वो केवल भ्रामक है। ऐसा प्लास्टिक चावल से नहीं बल्कि चावल में अमाइलॉज के कारण होता है। यदि चावल में अमाइलॉज की मात्रा 10 प्रतिशत है तो वह कम उछलेगा, यदि 15 प्रतिशत है तो थोड़ा अधिक और 20 से 25 प्रतिशत है तो अधिक उछलेगा। प्लास्टिक इतना सस्ता भी नहीं जिसे चावल में मिलाया जा सके।
00 हर वैरायटी का सैम्पल लिया गया : शर्मा
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं सचिव खाद्य विभाग एवं नागरिक आपूर्ति विभाग छत्तीसगढ़ ऋचा शर्मा ने कहा कि, हर तरह के वैरायटी के चावल का सैम्पल लिया गया। लूज चावल, पीडीएस का चावल सभी की जांच हुई। नतीजा सबके सामने है कि, कोई प्लास्टिक नहीं है। जिला कलेक्टर को भी निर्देश दिया गया है कि, नागरिक आपूर्ति निगम के जितने भी भंडार है वहां से सैम्पल लेकर जांच कराएं। उन्होंने कहा कि, राज्य सरकार अपनी जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं कर सकती वह तो जनता के स्वास्थ्य का पूर्णत: ध्यान रख रही है। सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, आरोप तो लगते हैं और कोई भी लगा सकता है लेकिन वैज्ञानिक निष्कर्ष और रिपोर्ट आज पेश की जा रही है और यह ही सत्य है।
पत्रकारवार्ता में जनसंपर्क विभाग के डायरेक्टर राजेश टोप्पो और डायरेक्टर फूड डोमन सिंह सहित जनसंपर्क विभाग और स्वास्थ्य एवं सचिव खाद्य विभाग एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी मौजूद थे।

 

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