हलषष्ठी व्रत कर व्रतियों ने रखी पुत्र की दीर्घायु रहने की मनोकामना

रायपुर| सुबह से आज हलषष्टि व्रत रखकर माताओ ने अपनी पुत्र की लम्बी आयु की कामना कर उपवास रखी। इस दिन विशेष रूप से पसहर की चावल की फलाहार,भैस की दूध,दही,घी,महुए की पत्ते की पत्तल से भोजन करना होता है। और इस दिन हल चले जमीन पर व्रतियों को चलना मना रहता है।

पूजा में दो बनावटी तालाब घर के आंगन में बनाकर उसमें जलभर कर वरुण देव का पूजन किया जाता है।साथ मे तालाब के पास में ख़िलोने डोंगा नाव लट्टू भौरे आदि बच्चों के लिए रखा जाता है  ।इसकी कथा में नारद जी ने देवकी से कथा सुनाते हुए कारागृह में  पुत्र की लंबी आयु की कामना की व्रत के बारे में बताया कि जिसे करने के बाद उन्होंने हलषष्टि मा की कृपा से भगवान श्रीकृष्ण जी को प्राप्त किया ।पूजा के अंत में माँ अपने पुत्र की पीठ पर पोतनी से मारने की विधि विधान इसमे मानी गई है ।प्रायः हर मुहल्लों की घरो चौक चौराहों मे इसकी पूजा की गई और उपवास रहकर अपने सन्तान की लम्बीआयु की कामना रखी।

 

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