चरण पादुका योजना के बाद अब वनवासियों के पैर नहीं काटने पड़ते : डॉ. रमन

00 वन मंडई महोत्सव में मुख्यमंत्री ने किया वनवासियों को संबोधित 

रायपुर। जब मैंने चरण पादुका योजना शुरू की थी तो लोगों ने मजाक उड़ाया था, आज इसी चरण पादुका योजना के कारण वनवासियों के पैर नहीं काटने पड़ते। ये बातें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कही। वे रविवार को वन मंडई महोत्सव में वनवासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दावा किया है कि, देश के अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासियों के लिए कार्य और योजनाएं संचालित करने में अव्वल है। आप किसी भी राज्य में चले जाइए, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए जितनी योजनाएं छत्तीसगढ़ में चल रही हैं, उतनी किसी भी राज्य में नहीं। मुख्यमंत्री ने रविवार अपरान्ह यहां विज्ञान महाविद्यालय के मैदान में आयोजित वन मड़ई का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बताया कि, लोग बोलते थे कि, ये चरण पादुका क्यों दी जा रही, वनवासी चप्पल पहनते है । मेरा कहना था कि, चप्पल वो इसलिए नहीं पहनते कि उन्हें पहनना नहीं आता बल्कि इसलिए नहीं पहन पाते क्योंकि उनके पास चप्पल के लिए पैसे ही नहीं है। चप्पल नहीं होने के कारण वनवासियों के पैरों में गैंग्रीन की बीमारी हो जाती थी, इस कारण पैर काटने तक की नौबत आ जाती थी, मगर अब वो नौबत नहीं आती। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 13 लाख तेंदुपत्ता संग्राहकों को अब तक चरण पादुका दी है। वो दिन दूर नहीं जब बस्तर, सरगुजा जैसे आदिवासी वनांचल से हमारे बच्चे आईएएस और आईएफएस बनकर आएंगे और राष्ट्र स्तर पर नाम रौशन करेंगे। वनवासियों के लिए स्मार्ट कार्ड में 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपए राशि की गई है। स्वास्थय सुविधा भी बेहतर की जा रही है।
देश के तीन सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में जल्द आएगा छत्तीसगढ़ :– राज्य तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। बहुत जल्द छत्तीसगढ़ देश के तीन सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में आ जाएगा। डॉ. सिंह ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को सिंचाई के लिए नि:शुल्क बिजली दी जा रही है। उनके खेतों में सोलर पम्पों की स्थापना के लिए सौर सुजला योजना शुरू की गई है। वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा की बेहतर व्यवस्था की गई है। बस्तर और सरगुजा में मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। नये कॉलेजों और नये आईटीआई की भी स्थापना की गई है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के जरिए इन क्षेत्रों के बच्चों को मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ-साथ आईआईटी जैसे संस्थानों में प्रवेश मिलने लगा है। प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी पांच संभागीय मुख्यालयों में चल रहे प्रयास आवासीय विद्यालयों में सीटों की संख्या 1700 से बढ़ाकर तीन हजार करने का निर्णय लिया है। नईदिल्ली में छत्तीसगढ़ सरकार ने यूथ हॉस्टल की स्थापना की है। राज्य के आदिवासी क्षेत्रों की तीन युवाओं का चयन संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के जरिए प्रशासनिक पदों के लिए हुआ है। शिक्षा की गुणवत्ता पर भी छत्तीसगढ़ सरकार पूरा ध्यान दे रही है।
वनोपजों की अच्छी कीमत देने का प्रयास :मुख्यमंत्री ने तेन्दूपत्ता, कुल्लू, खैर, हर्रा, साल बीज, लाख, इमली, आदि लघु वनोपजों की खरीदी के लिए वनोपज समितियों में 10 हजार से अधिक संग्रहण केन्द्रों के जरिए की गई व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा – हम सबका यह प्रयास है कि इनकी अच्छी कीमत हमारे वनवासी भाई-बहनों को मिले। विगत 5000 दिनों में तेन्दूपत्ते का पारिश्रमिक 450 रुपए से बढ़ाकर 1800 रुपए कर दिया गया है। प्रदेश भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए लगभग 59 लाख गरीब परिवारों को मात्र एक रुपए किलो में चावल दिया जा रहा है। वन क्षेत्रों के परिवारों को भी इसका लाभ मिल रहा है। तेन्दूपत्ता और अन्य वनोपज संग्रहणकर्ता परिवारों के लिए सामूहिक बीमा योजना और उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना भी चलाई जा रही है।
वन समितियों को दी शुभकामनाएं : – मुख्यमंत्री ने वन मड़ई कार्यक्रम में प्रदेश के कोने-कोने से पहुंची समितियों को शुभकानाएं दी। उन्होंने कहा कि, सरकार के 5 हजार दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में सभी का स्वागत है। छत्तीसगढ़ की हमारी संस्कृति,गीत, संगीत की मधुरता इस वनआच्छादित छत्तीसगढ़ में वन समितियों की मेहनत का ही नतीजा है। सन 2000 में स्थापना के बाद 17 साल का विवरण हमारे क्षेत्र में आए परिवर्तन जिसमें, आर्थिक व समाजिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ ये समितियों की ही देन है। प्रदेश में सबके जीवन के परिवर्तन के लिए बड़े कार्य हुए हैं। लाखों हाथों को काम मिला है। आज जो ये पांच हजार दिन पूरे होंगे, यह जनता के आशीर्वाद से ही मुख्यमंत्री के नाते पूरा करने में सफल हुआ हूं। छत्तीसगढ़ निर्माण के समय के बाद 16 से अब 27 जिलों का छत्तीसगढ़ सबके सामने हैं। इनमें से 6 जिले बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के हैं। इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर काम हो रहा है।
वनवासियों के लिए योजनाएं चलाने में छत्तीसगढ़ अव्वल :  मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि, छत्तीसगढ में वनवासियों के लिए जितनी योजनाएं चल रही है,उतनी योजनाएं किसी दूसरे राज्यों में नहीं चल रही है। हर प्रदेश के मुकाबले छत्तीसगढ़ अव्वल है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा आज्ञदिवासियों के लिए कार्य किया जा रहा है। सबसे अधिक योजनाएं यहां आदिवासियों के लिए है। तेंदूपत्ता संग्राहकों और वनवासियों के लिए चरण पादुका योजना चालू है। विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि, वन विभाग का यह आयोजन वन मड़ई के नाम से जो किया गया वो राज्य सरकार के 5 हजार दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया है। यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के विश्वास को प्रदर्शित करता है।
वन मंत्री महेश गागड़ा ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के 5 हजार दिन पूरे होने पर यह आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के विकास की झलक दिखाने की कोशिश की गई है।
तीन दिनों तक चलेगा वन मड़ई :  रविवार से शुरू हुआ वन मड़ई का आयोजन तीन दिनों तक चलेगा। वन विभाग के इस आयोजन में 250 हर्बल चिकित्सक शामिल हुए हैं। 20 प्रख्यात नाड़ी वैद्य भी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम की शुरूआत पारंपरिक वाद्ययंत्रों की रंगारंग प्रस्तुुति से हुई। लोकरंग अर्जुनंदा की प्रस्तुति हुई। लोक नृत्य ने शमां बांधा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वन विभाग की स्मारिका का विमोचन किया। संयुक्त वन प्रबंधन समिति की कैसेट और मार्गदर्शिका का विमोचन किया। डॉ. सिंह ने लघु वनोपज समितियों और वन प्रबंधन समितियों को लाभांश राशि के चेक भी वितरित किए। उन्होंने तेंदूपत्ता श्रमिक परिवारों के बच्चों की मेडिकल, आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार की ओर से देने की भी घोषणा की। कार्यक्रम के अंत में राम प्रताप सिंह पादप बोर्ड के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट किया। वन विभाग के आयोजन में मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल,मंत्री राजेश मूणत,मंत्री महेश गागड़ा सहित गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा, खेल मंत्री भईयालाल राजवाड़े, पादप बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह सहित अन्य पदाधिकारी और विभिन्न जिलों की लघु वनोपज सहकारी समितियों और वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों ने हजारों की संख्या में हिस्सा लिया।

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