विश्व का एक मात्र मंदिर जहा विराजित है माता कौशल्या की गोद में श्रीराम

 

शैलेष कुमार शर्मा  

०० आठवी शताब्दी में सोमवंशी राजाओ ने किया था मंदिर का निर्माण

०० पर्यटन मंडल की अनदेखी से मंदिर की प्रसिद्धी का नहीं हो रहा प्रचार-प्रसार

०० जन-आस्था का केंद्र है चंदखुरी स्थित माता कौशल्या का मंदिर   

रायपुर|छत्तीसगढ़ में सैकड़ो पर्यटन सहित धार्मिक स्थलों की बहुतायत है,मगर राजधानी के सबसे निकट पुरातत्वीय दृष्टि तथा धार्मिक लोक आस्था का केंद्र चंदखुरी स्थित माँ कौशल्या माता का मंदिर विश्व-प्रसिद्ध है| इस मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण गुण यह है कि पुरे संसार में कौशल्या माता का एक मात्र मंदिर ग्राम चंदखुरी(चन्द्रपुरी)में ही है जिसके कारण इस क्षेत्र के रहवासियों की आस्था इसमें सबसे अधिक है|भगवान् श्रीरामचन्द्र जी को गोद में लिए हुए माता कौशल्या माँ की मूर्ति इस मंदिर में विराजित है जो अत्यंत ही मनमोहक है साथ ही तालाब के बीचोबीच इस मंदिर की स्थापना किये जाने की वजह से प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलता है|पुरातत्वीय दृष्टि से मूल मंदिर का निर्माण आठवी शताब्दी के प्रारंभ में सोमवंशी राजाओ द्वारा कराया गया था|लोक आस्था का केंद्र होने के कारण समय-समय पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाता रहा है|परिणाम स्वरुप मंदिर का वास्तु रूप आज पुर्णतः विलुप्त हो चूका है,परन्तु शताब्दियों से जनआस्था एवं विश्वास की उर्जा सामान गति से प्रवाहित होती रही है और लोगो की श्रध्दा माता कौशल्या की दिव्य विमुर्ती से आप्लवित होती रही है|

राजधानी से महज 25 किमी की दुरी पर स्थित चंदखुरी ग्राम पंचायत की पावन धरा पर विश्व की एक मात्र मंदिर जिसमे भगवान् श्रीराम की माता कौशल्या की मूर्ति विराजित है|चंदखुरी के विशाल तालाब के बीचो-बीच स्थापित इस मंदिर में माता कौशल्या की गोद में भगवान् श्रीराम की मूर्ति स्थापित है जो बेहद मनमोहक है| मंदिर के चारो ओर सुन्दर वृक्षों सहित अनगिनत फूलो की बगिया बनी हुई है जो प्राकृतिक सुंदरता को निखारती है|इस मंदिर के इतिहास के संबंध में प्राचीन धर्मग्रंथो से ज्ञात होता है कि कौशल देश छत्तीसगढ़ के राजा महाकौशल की पुत्री होने के कारण राजमाता को कौशल्या नाम से संबोधित किया जाता था|कौश्लात्मजा कौशल्या मातु राम जननी वाल्मीकि रामायण में इच्छावकु वंश के राजा दशरथ और कौशल देश के राज कन्या कौशल्या के विवाह का विषद वर्णन है|धर्मग्रंथो से यह भी ज्ञात होता है कि इस विवाह के अवसर पर कौशल नरेश महाकौशल ने अपनी पुत्री को श्रीधन के रूप में दस हज़ार गाव दान में दिए थे|राजमाता कौशल्या की गणना अपने समय के महान विदुषी नारियो में की गई है|वेद वेदांत पर उन्हें अद्भुत पांडित्य प्राप्त था|शास्त्रों के अनुसार उनके आचरण को देखकर हो समकालीन ऋषि मुनि वेदों के मर्म को हृद्यांगमन कर लेते थे|ऐसी महिमामयी सर्व कल्याणमयी सर्वदा मंगलमयी तथा वात्सल्य भावो की अनवरत वर्षा करने वाली माता कौशल्या का चंदखुरी में विराजमान श्री विग्रह दिव्य एवं अलौकिक विभूतियों में से समलंकृत है तथा संतप्त को प्राण देने वाली है|चंदखुरी ग्राम प्राचीन काल में दक्षिण कौशल राज्य के अंतर्गत आता था जहा के राजा भानुमंत माता कौशल्या के पिता थे|गाव के तालाब मध्य में माता का भव्य मंदिर है,यह मंदिर उतरवर्ती काल का उत्तम स्मारक है जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक रामायण काल के दक्षिण कौशल से जोडती है| मंदिर तालाब के मध्य में होने की वजह से इसको किनारे से जोड़ने के लिए सेतु पुल का निर्माण किया गया है जिसे सुषेण सेतु के नाम से जाना जाता है|चंदखुरी के सम्बन्ध में यह मान्यता प्रचलित है कि प्रसिद्ध वैध सुषेण यहाँ का मूल निवासी था| इस मंदिर के संबंध में नया इंडिया प्रतिनिधि शैलेष कुमार शर्मा ने मंदिर के कोटू डोमार से बात करने पर बताया कि आठवी शताब्दी के इस ऐतिहासिक मंदिर के विकास के लिए कौशल्या माता मंदिर समिति के द्वारा पिछले कई वर्षो से शासन को पत्र लिखा गया है साथ ही समिति तथा ग्रामवासियों द्वारा मुख्यमंत्री सहित इस क्षेत्र के सांसद,विधायक सहित प्रदेश के कद्दावर नेताओ को भी मुलाकात कर सौन्दर्यीकरण किये जाने की मांग की गयी है मगर सिर्फ आश्वासन ही दिया जा रहा है|पर्यटन मंडल द्वारा भी इस ऐतिहासिक मंदिर को संरक्षित किये जाने को लेकर किसी भी प्रकार की पहल नहीं की जा रही है जिसके चलते मंदिर का मूलरूप विलुप्त होता जा रहा है|

ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल नहीं किया जा रहा है:- पुरातत्वीय दृष्टि से मूल मंदिर का निर्माण आठवी शताब्दी के प्रारंभ में सोमवंशी राजाओ द्वारा कराया गया था|लोक आस्था का केंद्र होने के कारण समय-समय पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार ग्रामवासियों द्वारा किया जाता रहा है|शासन की अनदेखी की वजह से छत्तीसगढ़ के अनमोल धरोहरों में इस विश्व विख्यात मंदिर को शामिल नहीं किये जाने की वजह से यह विलुप्ति के कगार पर है जिसके संरक्षण किये जाने से पर्यटन को बढावा मिल सकता है| राजधानी से कुछ दुरी पर स्थित होने की वजह से छत्तीसगढ़ आने वाले के पर्यटकों को लिए ये एक बेहद मनोहारी तथा धार्मिक केंद्र हो सकता है|

०० विकास की राह देख रहा है चंदखुरी का यह मंदिर:- छत्तीसगढ़ राज्य बने आज 16 साल से अधिक हो चुके है|प्रदेश में लगातार विकास की बयार बह रही है,प्रदेश के पर्यटन तथा धार्मिक स्थलों को लगातार शासन द्वारा विकास से जोड़ा जा रहा है मगर राजधानी के सबसे निकट स्थित इस विश्व प्रसिद्ध विख्यात कौशल्या माता मंदिर के विकास के नाम पर महज कागजी कार्यवाही ही हुई है|मंदिर के विकास के नाम पर पर्यटन मंडल द्वारा करोडो की राशि प्रतिवर्ष धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार तथा विकास पर खर्च किये जा रहे है मगर चंदखुरी स्थित माँ कौशल्या मंदिर के नाम पर पर्यटन मंडल द्वारा सौन्दर्यीकरण,जीर्णोद्धार तथा विकास में कोताही बरत रही है|सूत्रों की माने तो चंदखुरी स्थित मंदिर के नाम पर पर्यटन मंडल द्वारा लाखो की राशि का आहरण कर दुसरे मदों पर खर्च किया जा रहा है मगर मंदिर की स्थिति जस की तस बनी हुई है|

 

 

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