धूमधाम से मनाया गया ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक घरोहर भोजली त्यौहार

०० कोटा नगरी के कोटसागर तालाब में किया गया भोजली विसर्जन

बिलासपुर|  छत्तीसगढ़ की इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक घरोहर त्यौहार भोजली का विसर्जन गीत संगीत के साथ आज नौ दिनो बाद भोजली को नदी तालाबों में विसर्जन किया गया| सिर पर टोकरी में पिला ज्वारा लिए भजन कीर्तन के साथ बच्चों  और महिलाओं का समूह आज भोजली  विसर्जन में बढ़ी भीड़ और उत्साह के साथ देखने को मिला|

कोटा नगरी के कोट सागर धाम में प्रतिवर्ष के भांति लोगों ने इस वर्ष भी मनाया एक दूसरे को भोजली प्रेम-भेट कर मितान गिया  बदने की परंपरा निभाई गयी| इस लोक पर्व को लेकर लोगों में आनंद और उत्साह आज कोटा नगरी में देखने को मिला भोजली विसर्जन का कार्यक्रम 3:00 बजे से लेकर शाम तक किया गया भोजली विसर्जन के वक्त महिलाओं और बच्चों ने एक गीत की प्रस्तुति  की है देवी गंगा देवी गंगा लहर तिरंगा हमर भोजली दाई के विजे ऑटो अंगा ऐसा गीत के माध्यम से  भोजली के त्यौहार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन रखा गया था जिसमे काव्य नाटक लोक गीत श्लोक गीत संगीत के माध्यम से आज लोगों का उत्साह देखने को मिला सावन के दूसरे पक्ष की पंचमी तिथि को मंदिरों या फिर घर में पूजा स्थल में गेहूं चना बोया जाता है भोजली को सूर्य की रोशनी से बचा कर रखा जाता है इसे अंधेरे कमरे में रखा जाता है वही त्योहार के अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष मुरारी लाल गुप्ता, कोटा थाना प्रभारी कमलेश सिंह ठाकुर, नगर पंचायत पार्षद मनोज साहू आदि लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे|

 

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