सावधान, मुंगेली मे है आवारा मवेशिया का राज ,चले जरा सम्हल कर

कन्हैया यादव की विशेष रिपोर्ट
मुंगेली – राज्य सरकार ने मुंगेली को जिला तो बना दिया है किन्तु लगता है कि जिला बनाने के बाद इस शहर को लावारिस छोड दिया है जिला मुख्यालय में कलेक्टर व जिलापुलिस अधिक्षक से लेकर तमाम आला अधिकारी व नगर पालिका अध्यक्ष शोपीस की तरह केवल दफतरों की शोभा बडा रहे है मुंगेली में इंसानो का नही केवल मवेशियों का राज चलता है यहां के लोगो को सबसे ज्यादा डर आवारा मवेशियों से लगता है । शहर की ऐसी कोई सडक या बाजार नही है जहां आवारा मवेशियों का जमावडा नजर नही आता । भैस के आगे बीन बजाय भैस चले पगुराय की कहावत यहा सही चरितार्थ होती है । सडक के बीचोबीच खडे मवेशियों को वाहनो के हार्न से क्या लेना देना । लेकिन हा जब कभी मंत्री, विधायक कलेक्टर, एस पी या वी आई पी गाडिया इन सडको पर निकलती है तो उनके काफिले के निकलने के लिए जरूर मवेशियों को हटा दिया जाता है एसे लगता है कि मानो आम आदमी की कोई कीमत ही नही है । इन आवारा मवेशियों के चलते आयेदिन शहर में दुर्धटनाएं होती रहती है। कलेक्टर साहब जरा राचिये जब किसी स्कूली बच्चे या महिला को कोई सांढ या आवारा मवेशियों दौडाता होगा तो उस बच्चे या महिला पर क्या गुजरती होगी । अफसर तो वातानुकुलित व बंद शिशे वाली कारों में बैठ कर सुरक्षा व्यवस्था के साथ फर्राटे के साथ निकल जाते है । केवल चमचमाती सडक या मार्ग विभाजक बना देने से कुछ नही होता लोग इसका समुचित या बिना बाधा के उपयोग कर सके इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए । आखिर नगर पालिका या जिला प्रशासन का काम ही क्या है, नगर पालिका के अधिकारी ,कर्मचारी,पदाधिकारी भी इस मामले उदासिन रवैया बनाये हुए है । सभी कान में तेल डालकर व आखों में पट्टी बांध कर बैठे है । किसी को भी शहर व जनता की चिन्ता नही है । जरूरी है कि आवारा मवेशियों को पकडने के लिए अभियान चलाया जाये । इतना ही नही इन मवेशियों के मालिकों के उपर भी कडी कार्यवाही होनी चाहिए । ऐसा लगता है कि नगर पालिका या जिला प्रशासन किसी बडी दुर्धटना का इंतजार कर रही है ।

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