आदिवासियों के हितार्थ बनाए कानून का बस्तर में नहीं हो रहा पालन : फूलमन  

00 आदिवासियों के सामाजिक आर्थिक अध्ययन के लिए उनका दौरा 

रायपुर/जगदलपुर। संयुक्त राष्ट्र संघ के उपाध्यक्ष और एशिया क्षेत्र के स्थाई प्रतिनिधि फूलमन चौधरी ने कहा कि आदिवासी ईमानदार हैं और वह ईमानदारीपूर्वक रह कर बस्तर में जीवन यापन कर रहे हैं। चौधरी ने बस्तर क्षेत्र में उठ रही छठी अनुसूची की मांग के संबंध में जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र परिषद में आदिवासियों के हित के लिए जो कानून बनाए गए हैं, उसका पालन इस क्षेत्र में होता नहीं दिख रहा है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर में सुरक्षा बलों की ओर से आदिवासियों पर किए जा रहे अत्याचार और अनाचार के संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुयी है और न ही उन्हें कोई शिकायती पत्र मिला है। ज्ञात हो कि कई मौके पर आदिवासी समाज की ओर से संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को उठाने का दावा किया है किंतु उसके उलट उपाध्यक्ष चौधरी ने इन सब बातों को सिरे से खारिज किया है। उपाध्यक्ष चौधरी ने सिर्फ यह बात कही कि वह आदिवासियों के आर्थिक और सामाजिक अध्ययन के लिए बस्तर आए हुए हैं और दीगर किसी मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है। बस्तर क्षेत्र में माओवादी समस्या के संबंध में जब उनसे पूछा गया तो चौधरी ने इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि वह इसकी जानकारी नहीं रखते हैं किंतु जिस प्रकार आदिवासियों को फंसाए जाने की जानकारी प्राप्त हो रही है वह ठीक नहीं है क्योंकि आदिवासी ईमानदार हैं। अनुसूची 5 के तहत आदिवासियों के लिए कई प्रकार की योजनाएं केंद्र व राज्य सरकार की ओर से बनाई गई है किंतु उसका इंप्लीमेंट बस्तर में नहीं किया जा रहा है यह कहना है संयुक्त राष्ट्र परिषद की मानव अधिकार से जुड़ी महिला बबिता कश्यप का। संयुक्त राष्ट्र परिषद के उपाध्यक्ष की पत्रकार वार्ता में उपाध्यक्ष के बजाय वही कई सवालों के जवाब देती रही। पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम तथा सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर भी मौजूद थे। संयुक्त राष्ट्र संघ के उपाध्यक्ष चौधरी और मानव अधिकार कार्यकर्ता बबिता कश्यप के स्वागत के दौरान बस्तर के आदिवासी समाज से जुड़े कई पदाधिकारी आदिवासी वेशभूषा में थे। कुछ लोगों ने कोया समाज की तरह वेशभूषा धारण की थी, तो कुछ ने धुरवा समाज की वेशभूषा धारण की थी।

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