भारतीय साहित्य के अनमोल रत्न थे गुप्त : डॉ. रमन     

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर जनता को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने जयंती की पूर्व संध्या पर आज जारी शुभकामना संदेश में कहा है कि स्वर्गीय श्री गुप्त भारतीय साहित्य जगत के अनमोल रत्न थे। पद्मविभूषण और पद्मभूषण के राष्ट्रीय अलंकरणों से सम्मानित राष्ट्र कवि ने वर्ष 1914 में स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में राष्ट्रीयता की भावनाओं से परिपूर्ण `भारत भारतीÓ जैसे काव्य ग्रंथ की रचना की और जनता में राष्ट्रीय चेतना जाग्रत करने का सार्थक प्रयास किया। अपने साहित्यिक जीवन में उन्होंने दो महाकाव्यों सहित 19 खंड काव्यों की रचना की और सैकड़ों कविताओं सहित कई ऐतिहासिक नाटक भी लिखे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. मैथिलीशरण गुप्त ने महाकाव्य साकेत, और यशोधरा, जयद्रथ वध और पंचवटी जैसे अनेक काव्यग्रंथों की रचना की। इन कालजयी रचनाओं सेे उन्हें हिन्दी साहित्य जगत में और पूरे देश में अपार लोकप्रियता मिली। श्री गुप्त वर्ष 1952 से 1964 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। भारत सरकार ने वर्ष 1953 में उन्हें पद्म विभूषण और 1954 में पद्मभूषण के राष्ट्रीय अलंकरणों से सम्मानित किया था। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र कवि की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 

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