कृषि मंत्री के मामले को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने किया जमकर हंगामा

००  हंगामे के बीच नहीं हुआ प्रश्नकाल,विपक्ष के सदस्य हुए निलंबित

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन बुधवार को भी विपक्ष ने प्रश्नकाल चलने नहीं दिया। विधायक कवासी लखमा ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बृजमोहन अग्रवाल के वन-विभाग की जमीन पर रिसॉर्ट बनाये जाने के मामले को उठाया। विपक्ष ने तीखे तेवर दिखाते हुए जमकर नारेबाजी की। इस बीच विपक्ष के सभी सदस्य गर्भगृह में प्रवेश किए और वहीं बैठकर धरना दिया। विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा की नियमावली के तहत् गर्भगृह में प्रवेश के कारण सभी के स्वमेव निलंबित होने की बात कही। उन्होंने निलंबित सदस्यों को बाहर जाने कहा लेकिन विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते ही रहे इस बीच सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी वहीं ध्यानाकर्षण की कार्यवाही भी बाधित हुई।
प्रश्नकाल शुरु होते ही कांग्रेस से कोंटा विधायक कवासी लखमा ने मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुद्दे को उठाया। आदिवासियों की जमीन का मामला उठाया। रिसॉर्ट के नाम पर जमीन पर कब्ज़ा करने के मामले में स्थगन पर चर्चा कराये जाने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ये समय प्रश्नकाल का है, प्रश्नकाल में इस विषय को नहीं उठाया जाए , इसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
विधायक धनेन्द्र साहू ने कहा कि, महत्वपूर्ण विषय है, चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने विधायक साहू की बातों का समर्थन करते हुए फिर से नारेबाजी की। इस बीच 11:12 बजे सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित की गई।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद फिर हंगामा :- कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन कांग्रेस के सदस्यों ने फिर उक्त मामले को लेकर हल्ला बोला। इस पर संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि, प्रश्नकाल में ये मामला नहीं उठाया जा सकता। विपक्ष का ये रवैया लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है। पहले दिन भी किसानों की आत्महत्या के मामले में विपक्ष ने चर्चा की मांग की। आंसदी ने अनुमति दी और चर्चा भी हुई, लेकिन विपक्ष ने चर्चा भी नहीं चलने दी और हंगामा शुरू कर दिया था। मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा कि ,सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है, लेकिन विपक्ष आगामी चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए केवल राजनीति के लिए इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है।कांग्रेस के विधायक भूपेश बघेल ने कहा कि, ये सरकार की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। हम कैसे अपनी बात नहीं रखें। जब सरकार पर विश्वास ही नहीं है, तो उस सरकार से हम क्या सवाल पूछेंगे। आसन्दी ने विपक्ष से आग्रह किया कि प्रश्नकाल बाधित न किया जाए. इसके बाद भी सत्तापक्ष-विपक्ष के विधायकों के बीच जमकर तकरार होती रही। आसंदी ने पुन: पक्ष-विपक्ष के सदस्यों से आग्रह किया कि, दोनों ही दल प्रश्नकाल की गंभीरता को समझे. इसका सम्मान करें।
विपक्ष के सदस्यों ने किया गर्भगृह में प्रवेश :- देखते ही देखते विपक्ष से नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंहदेव, भूपेश बघेल सहित सभी सदस्य गर्भगृह में प्रवेश किए और नियम के तहत् स्वमेव निलंबित हो गए। गर्भगृह में सभी बैठ गए और नारेबाजी शुरू की और चर्चा की मांग करते रहे। मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय फिर खड़े हुए और कहा कि, सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन अभी प्रश्नकाल का समय है। प्रश्नकाल के बाद आसंदी से अनुमति मिलने पर चर्चा जरूर होगी। यदि विपक्ष मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर आरोप लगा रहा है या उनके विषय में बोल रहा है तो उन्हें इसकी सूचना नियमानुसार 24 घंटे पूर्व सदन को देनी चाहिए। प्रश्नकाल बाधित हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि, ये आदिवासियों की जमीन का मामला है, इसमें आश्वासन मिलना चाहिए।

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