राज्य के 14 जिलों में अल्प वर्षा, मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों की मदद के लिए प्रशासन हुआ सक्रिय

०० मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से कमिश्नरों-कलेक्टरों की बैठक ली

०० खरीफ फसलों के लिए नहरों से पानी छोड़ने के निर्देश
रायपुर| राज्य के 27 में से 14 जिलों की 70 तहसीलों में इस बार चालू मानसून के दौरान अब तक बारिश तुलनात्मक रूप से कम होने के कारण  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रशासन को किसानों की मदद के लिए आपात कालीन कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस सिलसिले में मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन 14 जिलों से संबंधित संभागीय कमिश्नरों और जिला कलेक्टरों की बैठक ली।
श्री ढांड ने बैठक में अल्प वर्षा प्रभावित इन तहसीलों में खरीफ फसलो की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने 50 से 70 प्रतिशत कम वर्षा वाली  तहसीलों में सिंचाई जलाशयों की नहरों से पानी छोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खरीफ में धान और अरहर की फसलों को बचाना जरूरी है। नहरों से तत्काल पानी खेतों तक पहुचाया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि इन क्षेत्रों में टूयूबबेल से सिंचाई के लिए विद्युत व्यवस्था सुचारू रूप से हो इस पर विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने नहरों के माध्यम से पानी खेतों तक सुचारू रूप से पहुंचे इसके लिए पेट्रोलिंग भी कराने के निर्देश दिए। बैठक में कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अजय सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री गणेश शंकर मिश्रा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सचिव सुश्री शहला निगार, राजस्व विभाग के श्री एन.के.खाखा, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य बीज विकास निगम श्री अलोक अवस्थी, आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री आर.प्रसन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
कृषि विभाग के संचालक श्री एम.एस. केरकेट्टा ने बैठक में कलेक्टरों को बताया कि खरीफ फसल के लिए जहां 35 दिनों से अधिक थरहा (नर्सरी) धान के पौधे हो गये है। उन्हें खेतो में तीन से चार पौधे एक साथ लगाने की सलाह किसानों को दी जाए। इसी प्रकार ब्यासी न करें निदाई की जाए एवं नमी वाले खेतों में यूरिया का छिड़काव किया जाए। जहां नमी न हो वहां यूरिया का दो प्रतिशत घोल का छिड़काव करने की सलाह किसानों को दी जाए। आगामी 20 अगस्त तक वर्षा न होने पर दूसरी फसल जैसे- उडद, मूंग, तिल, एवं सरसों की फसल के लिए सलाह दी जा सकती है। बैठक में रायपुर कलेक्टर द्वारा अवगत कराया गया कि आरंग तहसील में गंगरेल जलाशय से नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाया जा चुका है। तिल्दा में भी पानी पहुंचाया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने जलाशयों से पानी छोड़ने के लिए जिला स्तरीय बैठक शीघ्र करने के निर्देश भी रायपुर संभाग एवं दुर्ग संभाग के आयुक्त को दिए। बलौदाबाजार जिला कलेक्टर ने बताया कि पलारी, कसडोल और बिलाईगढ़ में नहरों के माध्यम से पानी दिया जा रहा है। यहां पर किसानों द्वारा टूयूबबेल के माध्यम से भी सिंचाई की जा रही है। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को यह भी निर्देश दिए कि नहरों का पानी व्यर्थ न बहने पाये इसका विशेष ध्यान रखा जाए। राजनादगांव जिला कलेक्टर ने बताया कि राजनादगांव के छुरीया राजनादगांव डोंगरगढ़ और डोंगरगांव तहसीलों में भी किसानों को खेती के लिए जलाशयों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। दुर्ग जिला कलेक्टर ने बताया कि दुर्ग पाटन धमधा में किसानों द्वारा सिचाई पम्पों के माध्यम से सिंचाई की जा रही है। मुख्य सचिव ने तांदुला जलाशय से पानी आज ही से छोड़ने के निर्देश दुर्ग संभाग आयुक्त एवं कलेक्टर को दिए। उन्होंने बेमेतरा जिले की बिरला, साजा और नवागढ़ तहसीलों में किए जा रहे कार्यो की समीक्षा करते हुए कहा कि इन तहसीलों में नहरों एवं टूयूबबेल से सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने ट्रांसफारमर की कमी को भी शीघ्र ही निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने गरियाबंद की दो तहसीलों क्रमशः गरियाबंद और राजिम में सिंचाई के लिए सिकासार डेम से पानी छोड़े जाने के निर्देश दिए। इसी प्रकार कांकेर के भानूप्रतापपुर, दुर्गकोंदल और नरहरपुर में खरीफ फसल के लिए दुधावा डेम से पानी शीघ्र छोड़े जाने के निर्देश भी दिए। बिलासपुर के कोटा तहसील के लिए घांेघा जलाशय से पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर बिलासपुर ने बताया कि वर्तमान में टूयूबबेल के माध्यम से किसान सिंचाई कर रहें है। महासमुंद जिला कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान बताय कि महासमुंद और सरायपाली तहसील के किसानों को सिंचाई के लिए कोडार जलाशय से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने धमतरी जिले के कुरूद एवं मुंगेली जिले के लोरमी, कबीरधाम जिले के बोड़ला, बालोद जिले के गुरूर तहसीलों के लिए भी नहरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में इन सभी तहसीलों में पेयजल की स्थिति के साथ ही वर्षा के दौरान होने वाली मौसमी बीमारियों के रोकथाम एवं बचाव के लिए पूर्व से की गई तैयारियों की जानकारी भी ली। मुख्य सचिव ने मैदानी क्षेत्रों में कार्यरत मितानिनों को मुख्यालय में रहने एवं उनके क्षेत्र के गांवों में नियमित रूप से भ्रमण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मितानिनों के पास हर समय पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध रहें सुनिश्चित किया जाए।

 

 

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