पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना यज्ञ के समान: डॉ. रमन सिंह

०० छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल हुए एनजीटी के सम्मेलन में

०० नदियों और तालाबों को प्रदूषण से बचाने की जरूरत पर भी दिया जोर

रायपुर| छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने पर्यावरण संरक्षण में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी का आव्हान किया है। उन्होंने कहा है कि पेड़ लगाना और उनकी अच्छी देखभाल करना एक यज्ञ के समान है।डॉ. सिंह आज मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा आयोजित सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में वनों की सुरक्षा के लिए ऐसे कानून की जरूरत है, जिसके जरिए वन क्षेत्रों के विकास के लिए हो रहे कार्यों को और भी अधिक लाभदायक बनाया जा सके। उन्होंने कहा- पर्यावरण बचाने के लिए हम दूसरों से तो उम्मीद करते हैं कि वे नियमों का पालन करें, लेकिन हमें भी गंभीरता से पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा- गंगा में डुबकी लगाकर हम स्वयं को पवित्र समझने लगते हैं, लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं देते कि गंगा जैसी पवित्र नदियों का पानी कितना प्रदूषित होता जा रहा है। हमें नदियों, तालाबों और अन्य जल स्त्रोतों को प्रदूषण से बचाने के बारे में भी सोचना होगा और सार्थक प्रयास करने होंगे। सम्मेलन में एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।

डॉ. रमन सिंह ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा- छत्तीसगढ़ में आज अगर लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र है, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय वहां के वनवासियों को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा- छत्तीसगढ़ में वनवासी ही वनों की रक्षा कर रहे हैं। हरे-भरे वन हमारे लाखों वनवासी परिवारों के जीवन यापन का प्रमुख आधार हैं। संयुक्त वन प्रबंधन योजना के तहत राज्य सरकार ने वनक्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की भागीदारी से सात हजार 887 वन प्रबंधन समितियों का गठन किया है। प्रदेश के लगभग बीस हजार गांवों में से लगभग ग्यारह हजार गांव वनक्षेत्रों की सीमा से पांच किलोमीटर भीतर स्थित हैं। वन प्रबंधन समितियों को इन गांवों और उनके आस-पास के क्षेत्रों में जंगलों की सुरक्षा और वन संवर्धन का दायित्व सौंपा गया है।प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का जिक्र करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता की इस योजना में देश के पांच करोड़ गरीब परिवारों की महिलाओं को लकड़ी और कोयला आधारित चूल्हे केे धुंए से बचाने के लिए सरकारी अनुदान पर रसोई गैस कनेक्शन दिए जा रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा प्रधानमंत्री की इस योजना से देश में हर साल लगभग बीस करोड़ पेड़ों को कटने से बचाय जा सकेगा। डॉ. सिंह ने विभिन्न मूल्यवान वृक्षों की विलुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए टिश्यू कल्चर तकनीक के उपयोग पर विशेष रूप से बल दिया और कहा कि छत्तीसगढ़ में इस दिशा में गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा- कानून में कुछ ऐसा बदलाव किया जाना चाहिए, जिससे ज्यादा वन क्षेत्र वाले राज्यों के हितों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल असर न हो। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में वनक्षेत्रों के अन्तर्गत 100 करोड़ के किसी प्रोजेक्ट के लिए कैम्पा निधि में 150 करोड़ रूपए जमा करने पड़ते हैं। इसका एक यह लाभ यह है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जा सकता है।डॉ. रमन सिंह ने देश में पर्यावरण संरक्षण के लिए राष्ट्रीय हरित न्यायधिकरण (एनजीटी) द्वारा किए जा रहे प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि एनजीटी ने पर्यावरण को बचाने और साफ-सुथरा रखने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक असर देखा जा रहा है। डॉ. रमन सिंह ने बिजली उत्पादन के लिए कोयले के स्थान पर सौर ऊर्जा, जल विद्युत और पवन ऊर्जा की आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा। इसके फलस्वरूप पर्यावरण प्रदूषण को काफी हद तक रोका जा सकेगा। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार, एनजीटी मध्य क्षेत्र के सदस्य न्यायमूर्ति दलीप कुमार सहित मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालयों के कई न्यायाधीश तथा अनेक प्रसिद्ध पर्यावरण विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

 

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