छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की बात मिथ्या साबित : शुक्ला

०० छत्तीसगढिय़ा महिला क्रांति सेना को जंतर-मंतर में मिला अपार समर्थन
रायपुर। दिल्ली के जंतर-मंतर में सैकड़ों साल के इतिहास में पहली बार छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति एवं परंपरा का प्रदर्शन करते हुए मातृभाषाओं के माध्यम से शिक्षा देने के लिए किए गए सत्याग्रह को अपार जन समर्थन मिला। गुरुवार को ये बातें छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच के प्रांतीय संयोजक नंदकिशोर शुक्ला ने पत्रकारवार्ता में कही। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में प्रतिनिधि मंडल ने सांसदों और मंत्रियों के निवास तथा सांसद परिसर में जाकर छत्तीसगढ़ी सहित गोंडी, हल्बी, भतरी, कुडुख जैसी सभी मातृभाषाओं के माध्यम से पढ़ाई-लिखाई कराने राज्य सरकार को बाध्य करने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करने निवेदन किया। प्रतिनिधि मंडल को सभी ने अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार समर्थन व आश्वासन दिया।
दिल्ली में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. भूषण जांगड़े. डॉ. बंशीलाल महतो, रमेश बैस, ताम्रध्वज साहू, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी,अभिषेक सिंह,  बी.के.हरिप्रसाद,  पी.एल.पुनिया,  डॉ. विजय कुमार सोनकर शास्त्री ने समर्थन दिया। वहीं लोकसभा सांसद सदस्य लखन लाल साहू और राज्य सभा सदस्य छाया वर्मा ने सत्याग्रह में शामिल होकर प्रत्यक्ष समर्थन दिया। साथ ही अन्य राज्यों के सांसदों ने भी सत्याग्रह का समर्थन करते हुए कहा है कि, यह बिल्कुल जायज मुद्दा है, उन्होंने इस पर भी आश्चर्य जताया कि,छत्तीसगढ़ में मातृभाषा में शिक्षा क्यों नहीं हो रही? इसके जवाब में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें बताया कि जनभाषा से राजभाषा बनी छत्तीसगढ़ी सहित गोंडी, हल्बी, भतरी और कुडुख भाषाएंं हिन्दी के साथ मिलाकर पढ़ाई जाती है । इस पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में ये सब क्या हो रहा है, इस तरह की पढ़ाई तो कहीं भी नहीं होती है। छत्तीसगढिय़ा महिला क्रांति सेना ने अपने पारंपरिक पहनावे और गहनों के साथ सत्याग्रह प्रदर्शन किया। श्री शुक्ला और छत्तीसगढिय़ा महिला क्रांति सेना की प्रदेशाध्यक्ष लता राठौर का कहना है कि छत्तीसगढ की पहचान केवल नक्सलियों और बस्तर के नाम से है। जब हमने दिल्ली में सत्याग्रह किया तो बहुत से लोग हमसे मिले,हमने उन्हें छत्तीसगढ़ के बारे में बताया। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से जब छत्तीसगढ़ी में शिक्षा देने की बात की गई थी तो उन्होंने कहा था कि, हिन्दी का क्या होगा ? इसी तरह राज्यसभा सांसद छाया वर्मा ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था तो उसका जवाब अंग्रेजी में मिला। उन्होंने कहा है कि हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है। हम हिन्दी का समर्थन करते हैं लेकिन हम छत्तीसगढ़ी में भी पढ़ाई होने की मांग करते हैं और छत्तीसगढ़ी को पाठ्यक्रम में शामिल कर शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की बात मिथ्या साबित हुई। राजभाषा छत्तीसगढ़ी में काम-काज और मातृभाषा में पढ़ाई-लिखाई में अडंगा डालने वालों का तर्क पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठा निकला। छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की बात करने वालों की बातें व्यर्थ साबित हुई हैं।

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