सरकारी स्कूल के बच्चे खुद से पढ़ने को हैं मजबूर

रायपुर| D36राहुलपाली@ प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधारने और प्रदेश में अलख जगाने के लिए जहां एक ओर प्रदेश के कलेक्टर और विधायक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं वही शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते प्रदेश की कुछ स्कूले आज जर्जर और शिक्षकों की कमी से झुज रही है….इसे शिक्षा विभाग की लापरवाही कहें…की राजधानी रायपुर में सरकारी स्कूल के बच्चे खुद से पढ़ने को मजबूर हैं इन स्कूलों में ना तो भगवान है और ना ही शिक्षक इसके अभाव में प्रदेश को मजबूत बनाने और शिक्षा की अलख जगाने के सरकार के दावे कितने कारगर साबित होंगे यह कहना मुश्किल है….ज्यादा पुरानी बात नहीं है आज से दस- पन्द्रह  साल पहले हर वर्ग के 90 फीसदी से जायदा बच्चे को पढने के लिए सरकारी स्कूलों में ही भेजा जाता था….लेकिन आज उन्ही शासकीय स्कूल में छात्रो को पढने के लिए जान जोखिम में डालना पड़ रहा है…स्कूल भवन की छत की परत कभी भी गिर सकती है और कोई बड़ा हादसा हो सकता है….हम बात कर रहे है आर.डी तिवारी स्कूल की यहाँ छत की परत हर जगह से उखड़ते जा रही है….और एक बड़ी दुर्घटना का इन्तजार कर रही है |

वही आरडी तिवारी स्कुल के छात्र सेवा साहू का कहना है यहा कभी भी दुर्घटना हो सकता लेकिन कोई ध्यान नही देता और हम मजबूरी में यहा पढने आते है वरना जान जोख़िम में पढने का शौक किसे है साहब….इस पुरे मामले में जब स्कुल के प्रिंसपल ए.बल्लाल से बात किया गया तो प्रिंसपल का कहना है की इस पुरे मामले में कई बार शिकायत नगर निगम और कलेक्टर से करने के बाद भी किसी प्रकार का अभी तक कार्यवाही नही किया गया है | इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की नगर निगम और जिला प्रशासन कितना सजग है |

लगभग 300 बच्चों के लिए 3 शिक्षक यह सुनकर बड़ा अटपटा लगता है की तीन शिक्षक तीन सौ बच्चों को किस तरह पढ़ाते है लेकिन राजधानी रायपुर के टिकरापारा सरकारी स्कुल में तीन शिक्षक और 300 बच्चे यानी 100 बच्चे के पीछे एक टीचर इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की प्रदेश में किस तरह से देश का भावी भविष्य अपना भविष्य सवारने में लगा होगा….वही सरकार ,प्रशासन के तमाम दावे यहा फेल होते नजर आ रहे है….राजधानी रायपुर के टिकरापारा शासकीय स्कूल में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है…शाला में 12वी तक कक्षाएं लगती हैं, लेकिन शिक्षक सिर्फ 3 हैं….इसलिये छात्रों को पढ़ाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पढ़ रहा है….संचालित शासकीय शाला में बैठने की पर्याप्त सुविधा है….स्कूल में विद्यार्थियों की  संख्या कक्षा 9वी से 12वी तक लगभग 300 है….विद्यार्थी को 2 परेड खाली संयुक्त रूप से बैठकर अध्ययन करना पढता हैं…..यहां 3 शिक्षक पदस्थ है……तीनो शिक्षक क्रमशः अलग-अलग कक्षा में अध्यापन कराते हैं…..स्कूल के प्रधानपाठक का कहना है कि स्कूल में शिक्षक कम है….विद्यार्थियों की संख्या भी कम होती जा रही है…..शिक्षक कम होने के कारण बच्चों को संयुक्त रूप से अध्यापन नही कराते पाते है….सभी कक्षाओं के सिलेबस अलग अलग है पढ़ाई भी प्रभावित होती है…..हालांकि यहां शिक्षक की जरूरत है…..10 वी -12वी   कक्षा के अनुसार स्कूल में तीन ही शिक्षक है……शासन से शिक्षक की मांग सालों से कर रहे हैं, लेकिन शिक्षक अभी तक नहीं मिले है। इस मामले में नगर निगम महापौर का कहना है कि जिला शिक्षा विभाग से कई बार चर्चा किया जग्य है..आने वाले समय में समस्या का निराकरण किया जाएगा|

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