भूपेश बघेल पर गांव के स्कूल की जमीन हड़पने का आरोप

00 विधान मिश्रा, आर.के.राय और धरमजीत सिंह ने पत्रकारवार्ता में लगाया आरोप
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल पर एक बार फिर जमीन मामले को लेकर तलवार लटकते नजर आ रहा है। इस बार उन पर गांव के स्कूल की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लग रहा है। उक्ताशय का आरोप लगाते हुए पूर्व राज्यमंत्री विधान मिश्रा, विधायक आर.के.राय, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष घरमजीत सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि जमीन शिक्षा समिति भिलाई-चरौदा के नाम पर थी। 1998 में भूपेश बघेल के नाम कर दी गई। राजस्व मंत्री बनने के बाद अपनी पत्नी के नाम कर दी। इस मामले में संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि, स्कूल को जमीन वापस लौटाई जाए।
विधान मिश्रा ने आज पत्रकारवार्ता में कहा कि, भूपेश बघेल ने भिलाई-चरौदा की स्कूल की करीब 30 एकड़ जमीन हथिया ली है। बाजार में इस वक्त उस जमीन की कीमत 60 करोड़ रुपए है। छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ तो भूपेश राजस्व मंत्री बने और उस जमीन को अपनी पत्नी के नाम करवा दिया था।
पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष धर्मजीत सिंह, पूर्व मंत्री विधान मिश्रा व विधायक आर.के.राय ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर बेशकीमती जमीन स्कूल को लौटाने की मांग की है। उन्होंने संयुक्त रुप से कहा कि भूपेश बघेल ने स्कूल की जमीन का नामांतरण करवा लिया। तात्कालीन पटवारी और तहसीलदार के माध्यम से स्कूल की बेशकीमती जमीन हथियाने का खेल खेला गया है। बताया गया कि मामला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के गृह व निर्वाचन क्षेत्र का है। भिलाई-चरौदा में ग्राम शिक्षा समिति भिलाई के द्वारा संचालित थी। वर्ष 1980 के बाद उस स्कूल को साडा में शामिल कर शासकीयकरण कर दिया गया। उस स्कूल की 29,90 एकड़ जमीन अध्यक्ष ग्राम शिक्षा समिति भिलाई के नाम पर दर्ज थी। खसरा क्रमांक 319-2(3.75 एकड़), 326-6 (6.93 एकड़), 326-7 (19.22 एकड़) राजस्व अभिलेख में दर्ज था। 1998-1999 में उक्त जमीन गोपनीय तरीके से भूपेश बघेल पिता नंदकुमार बघेल के नाम पर दर्ज की गई। रिकार्ड में लिखा गया कि लोक अदालत खंडपीठ के प्रकरण क्रमांक 36-94 के अनुसार रिकार्ड दुरूस्त किया गया है।
साडा भंग होने के बाद नामांतरण : – विधान मिश्रा ने कहा कि 7 जून 1998 को साडा भंग किया गया। 8 जून 1998 को भिलाई नगर निगम की स्थापना हुई। साडा के भंग होने के 3 माह के भीतर तहसीलदार से स्कूल की जमीन के नामांतरण की पुष्टि करवा ली गई। शासन की जमीन बिना राज्य सरकार के कैबिनेट की बैठक में अनुमोदन के बगैर आबंटित नहीं हो सकती। इस तरह पूरा मामला संदेह के दायरे में है। इसमें साडा की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले की जिलाधीश, राजस्व विभाग व आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से जांच होनी चाहिए और उक्त जमीन को अवैध घोषित कर स्कूल के नाम पर चढ़ाना चाहिए।

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