Tuesday, April 7, 2020
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विधानसभा बजट सत्र: धान खरीदी के मुद्दे पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने तख्तियां लहराईं, गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे

०० काले कपड़े पहनकर सदन में पहुंचा विपक्षधान खरीदी फिर से शुरू करने की मांग

०० भाजपा विधायकों ने धान खरीदी में गड़बड़ी का आरोप लगाया, बिजली के बकाए का भी मुद्दा उठा

रायपुर| छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को हंगामा जारी रहा, धान खरीदी के मुद्दे पर सरकार विपक्ष के निशाने पर है। काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष के सदस्य हंगामा करते हुए गर्भगृह तक पहुंच गए और नारेबाजी करते हुए तख्तियां लहराने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबित सदस्यों को बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन वे नारेबाजी ही करते रहे। इस पर सदन स्थगित कर दिया गया। इसके बाद विपक्षी विधायक गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। 

इससे पहले भाजपा और संयुक्त विपक्ष के सदस्यों ने धान खरीदी को फिर से शुरू करने की मांग की। विपक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा ​कि 1 लाख 34 हजार 212 किसानों का धान अभी भी खरीदा नहीं गया है। उन किसानों का धान सरकार को खरीदना चाहिए। भाजपा ने इस मामले में मुख्यमंत्री से बचे किसानों का धान खरीदने की घोषणा करने की मांग की। भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सरकार बने एक साल ही हुआ है और किसान आत्महत्या की अनुमति मांग रहे हैं, इससे ज्यादा शर्म की बात किसी सरकार के लिए क्या हो सकती है। बृजमोहन अग्रवाल और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि धान खरीदी को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों को सरकार के मंत्री शिव डहरिया दलाल कह रहे हैं। ये असंसदीय है, मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। जेसीसी विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सरकार कोचिया कह रही है। उनके धान की जब्ती बनाई जा रही है। किसान सड़कों पर लेटने को मजबूर हो रहे हैं। विपक्ष की मांग पर सदन में जवाब देते हुए कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि सरकार ने किसानों को 83 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा है। अगर आपको किसानों की इतनी चिंता है, तो आप मुख्यमंत्री से क्यों नहीं मिले?  इतना सुनते ही विपक्षी सदस्य फिर से शोर-शराबा करने लगे। हंगामे के बीच ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि स्पीकर स्थगन की सूचना पढ़ रहे हैं, लेकिन ये सुनना ही नहीं चाहते। दरअसल विपक्ष ही चर्चा से भागना चाहता है। हम चाहते है किसानों के इस मामले पर सदन में चर्चा हो लेकिन विपक्ष खुद पलायन करता दिख रहा है।