Friday, February 28, 2020
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विभागों में होगी सशक्त और प्रभावी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली, मुख्य सचिव ने सभी विभागों को लिखा पत्र

०० नागरिक सेवाओं की आपूर्ति में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो

०० अधिकारी आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लें, अधिनस्थ कार्यालयों की करें आकस्मिक जांच

रायपुर| आम जनता की शिकायतों के समय पर निवारण के लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप प्रदेश के सभी विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों में सशक्त और प्रभावी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों को आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेने और अधिनस्थ कार्यालयों की आकस्मिक जांच करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव श्री आर.पी. मंडल ने सभी विभागों को इस संबंध में परिपत्र जारी कर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी कार्यालयों में नागरिक केन्द्रित प्रशासन की बेहतर संस्कृति व्यवहार में विकसित होनी चाहिए। इसके लिए शासन के प्रत्येक संगठन में एक सशक्त और प्रभावी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली की आवश्यकता है। जो नागरिक सेवाओं की आपूर्ति में विलंब, लापरवाही और गैर-जवाबदेही से उठने वाली शिकायतों का त्वरित निराकरण कर सके। शिकायत निवारण प्रणाली को सरल, तत्काल, उत्तरदेय और प्रभावी भी होना चाहिए। इस प्रणाली में ग्रामों में रहने वाली जनता तक सेवा प्रदान करने में उठने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। सिर्फ कम्प्यूटरीकृत प्रणाली के भरोसे ही इस विषय को न छोड़ा जाए।

लोक शिकायत निवारण प्रणाली में प्रत्येक कार्यालय के दैनंदिनी काम-काज पर आम नागरिकों से प्राप्त फीडबैक आधारभूत मानक की तरह हैं। मुख्य सचिव ने लिखा है कि लोगों को बार-बार कार्यालयों में जाना न पड़े उनके समय की बर्बादी न हो। कार्यालय प्रमुख और अन्य अधिकारी, किसी आवश्यक कार्य का बहाना करके जनता के लिए उपलब्ध न होना, अधिकारी कार्यालय समय का अनुपालन नहीं करना और कार्य के घंटों में कार्यालय में उपलब्ध नहीं होना, मोबाईल फोन रिसिव्ह नहीं करना, लोक कर्त्तव्यों का निष्पादन करते समय सरकारी कर्मचारी रूखा व्यवहार करते हैं और लोक सेवक के रूप में कार्य करने के स्थान पर वे प्रायः अधिकारों का प्रदर्शन जैसी शिकायतें नहीं होनी चाहिए। शासन के संगठनों में कार्य सम्पादन में विलंब, काम की गुणवत्ता में कमी एवं गैर-जवाबदेही को बदलना होगा। इसके लिए चुस्त मानीटरिंग की व्यवस्था, सभी कार्यालयों के काम-काज में होनी चाहिए। ये मानीटरिंग डाटा-बेस नहीं, अपितु वास्तविक धरातल पर होनी चाहिए। लोकसेवा गारंटी की सेवाएं हो अथवा अन्य सेवा सुपूर्दगी की सेवाएं हों, नागरिकों तक इनकी पहुंच सहज और सुगम्य ढंग से पहुंचने मंे अगर शिकायतें हैं, तो प्रभावी मानीटरिंग में शिथिलता को परिलक्षित करती हैं। इसके लिए सभी वरिष्ठ अधिकारी, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर मानिटरिंग व्यवस्था उपयुक्त प्रभावी और परिणाममूलक ढंग से करें। आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लें, इसके लिए अधिनस्थ कार्यालयों की आकस्मिक जांच करें। सूचना क्रांति के युग मेें प्रशासन के प्रतिमानों में व्यापक बदलाव हुआ है। बदलते प्रतिमानों के अनुरूप शासन की अनेक लोक-सुपुर्दगी सेवाएं राज्य में डिजिटल हैं। नागरिको को मूल-भूत सेवाएं घर पहुंच भी हों, ये मुख्यमंत्री की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए नागरिक सेवाओं की आपूर्ति में लगी विभिन्न संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए। लोक शिकायतों से यह पता चलता है कि आम नागरिकों को सेवा-सुपुर्दगी की डिजिटल सेवाओं की आपूर्ति में व्यवहारिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। मसलन घरेलू गैस सिलेन्डर के लिए श्रमिक और कम शिक्षित वर्ग के उपभोक्ताओं को अभी भी लाइन में खड़े होकर, पहले नंबर लगाना पड़ता है फिर उन्हें सिलेन्डर लाने के लिए दो से तीन दिन तक चक्कर भी गैस एजेंसियों के लगाना पड़ता है। इसी तरह की शिकायतें जन्म-प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भू-अभिलेखों की नकल इत्यादि डिजिटल नागरिक सेवाओं में भी प्राप्त हो रही हैं। लोक सुपुर्दगी सेवाओं की पहुंच आम नागरिकों तक सहज ढंग से करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल अथवा मोबाइल-एप सुविधामात्र हैं, इनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मानवीय संवेदनाओं को भी समझना होगा। विभाग की वेबसाईट पर भी लोक शिकायत प्रणाली के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएं। वेबसाइट पर लोक शिकायतों के दर्ज करने और उनके प्रभावी निराकरण को भी सुनिश्चित करें। आम जनता से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ‘जन चौपाल‘ से प्राप्त आवेदन का वेब-पोर्टल http: //janchaupal.cg.nic.in एवं मुख्यमंत्री सचिवालय एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त आवेदनों को पर http: //janshikayat.cg.nic.in दर्ज किया जाता है। वेब पोर्टल पर आवेदक को भी यह सुविधा दी गई है कि वह अपने प्रकरण में की गई कार्यवाही को देख सके। इसलिए प्रकरणों पर की गई कार्यवाही प्रभावी, सुस्पष्ट, तथ्यगत एवं सरल भाषा में हो, जिसे आवेदक समझ सके। मेरे ध्यान में यह भी लाया गया है कि वेब पोर्टल के प्रकरणों पर सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव स्वयं संज्ञान लें, संबंधित अवर सचिव, उप सचिव पर जवाबदेही तय करें और अपने अधिनस्थ सभी कार्यलयों की साप्ताहिक समीक्षा करना भी सुनिश्चित करें। प्रदेश में लोक शिकायतों के निराकरण हेतु वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग की प्रणाली भी प्रचलित है। इस प्रणाली से प्रतिदिन दोपहर 12 से 1 बजे तक शिकायतों का निराकरण शिकायतकर्ता की उपस्थिति में ही अधिकारी करते हैं। यह पारदर्शी और संवेदनशील प्रशासन का सर्वोत्तम उपाय है। इस प्रणाली में अधिकारी समय पर उपस्थित हों, यह जिला कलेक्टर और विभागीय भारसाधक सचिव सुनिश्चित करें। यदि संबंधित अधिकारी अपरिहार्य कारणों को छोड़कर, अनुपस्थित हों तो तत्काल संज्ञान लें और आवश्यक हो तो अनुशात्मक कार्यवाही भी करें। शिकायतों में बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारियों की शिकायतें भी शामिल हैं। शिकायतें पेंशन प्रकरणों मे अनावश्यक विलंब, सेवा संबंधी रिकार्ड को पूरा न करने, समय पर वेतन वृद्धि न लगने, सही वरिष्ठता सूची जारी न करना, वेतन निर्धारण में विलंब, सही पदोन्नति, उचित चिकित्सा सुविधायें आदि के संबंध में हैं। सभी विभाग और प्रशासकीय नियंत्राणाधीन कार्यालयों को कर्मचारियों की शिकायतों पर सहानुभूतिपूर्वक और शीघ्र कार्यवाही करने के लिए, संस्थागत ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है। यदि प्रकरण में स्थापना के कर्मचारी ने समय पर कार्यवाही करने में लापरवाही की है तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। मुख्य सचिव ने परिपत्र में लिखा है कि शासन के हर स्तर पर सुचारू शिकायत निवारण प्रणाली विकसित हो इसके लिए कार्य संपादन की संस्कृति सभी विभागों और उनके अधिनस्थ कार्यालय सुनिश्चित करें।