Thursday, December 12, 2019
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संस्कार भारती लोक कला साहित्य मंच के द्वारा मनकू द्वीप में मनाया गया दीपावली मिलन समारोह

०० रतनपुर संस्कार भारती कला मंच से 15 सदस्यीय टीम भी इस कार्यक्रम में थे सम्मिलित

रायपुर| संस्कार भारती लोक कला साहित्य मंच के द्वारा मनकू द्वीप में दीपावली मिलन समारोह मनाया गया जिसमे प्रदेश भर मंच की ओर से 132 लोग  हुए शामिल जिसमे रायपुर, दुर्ग,भिलाई, राजनांदगांव, धमतरी, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर, रायगढ़,महासमुंद, बलौदाबाजार, मुंगेली,सहित प्रदेश भर लोग शामिल होकर दीपावली मिलन समारोह मनाया और एक दूसरे को बधाई दिए| उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री अरुण शर्मा शामिल हुए तथा उन्होंने प्राकृतिक की सौंदर्यता और मनकू द्वीप की विशेषता को प्रदेश भर से आए संस्कार भारती के लोगो के बीच साझा किया। जिस पर प्रदेश भर से आए लोगो ने मनकू द्वीप की विशेषता को सुनकर खुशी जाहिर किया। उक्त कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के रतनपुर संस्कार भारती कला मंच से भी 15 सदस्यीय टीम भी शामिल होकर उक्त मिलन समारोह का लुप्त उठाया|

संस्कार भारती छत्तीसगढ़ प्रांत का दिवाली मिलन एवं धरोहर यात्रा कार्यक्रम प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक स्थल हरिहर क्षेत्र मदकू द्वीप  में संपन्न हुआ कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि पुरातत्व वेत्ता पद्मश्री डॉ अरुण शर्मा जी रहे छत्तीसगढ़ के विभिन्न इकाइयों से 132 सदस्य इस कार्यक्रम में परिवार सहित सम्मिलित हुए जहां पर  पुरातत्व अधिक्षक   डॉ प्रभात  कुमार सिंह ने  पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मदकू द्वीप के उत्खनन उसके पुरातात्विक महत्व की विस्तार से  जानकारी देकर के उपस्थित  कार्यकर्ताओं के प्रश्नों का जवाब  दिया कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में समस्त ईकाइयों द्वारा  सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई संस्कार भारती द्वारा  प्रति वर्ष आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में संस्कार भारती के समस्त कार्यकर्ता एक-दूसरे से परिचयात्मक संबंध बनाते हैं इसे ऊद्देश्य को लेकर यह आयोजन किए जाते हैं संस्कार भारती बिलासपुर इकाई के संयोजक में आयोजित इस कार्यक्रम में रतनपुर ईकाई से  अध्यक्ष शुकदेव कश्यप ब्रह्माणी कश्यप मंत्री दिनेश पांडे नीलू पांडे कोष प्रमुख मुकेश श्रीवास्तव श्रीमती वर्षा श्रीवास्तव सर्वज्ञ श्रीवास्तव संरक्षक अजय महावर  कीर्ति कहरा, दिव्या गोस्वामी, रामेश्वर शांडिल्य लक्ष्मी,शांडिल्, पीएल मरावी,  आशीष सिह ध्रुव सम्मिलित हुए वंदेमातरम के समवेत गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ|

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का इतिहास पर नज़र डाले तो हमें कई रोचक जानकारी प्राप्त होती है उसी क्रम में बिलासपुर जिले के बैतलपुर से चार किलोमीटर पहले सरगांव के पास इस नदी ने उत्तर एवं उत्तर पूर्व दिशा में दो धाराओं में बंटकर एक द्वीप का निर्माण किया है, जो मदकू द्वीप के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने का कोई पैदल मार्ग नहीं है और केवल नौका आदि से ही जाया जा सकता है। शिवनाथ नदी के पानी से घिरा मुंगेली जिले में स्थित मदकू द्वीप आम तौर पर जंगल जैसा ही है। शिवनाथ नदी के बहाव ने मदकू द्वीप को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक हिस्सा लगभग 35 एकड़ में है, जो अलग-थलग हो गया है। दूसरा करीब 50 एकड़ का है, जहां 2011 में उत्खनन से पुरावशेष मिले हैं। जिसे मदकू द्वीप कहते हैं।

यहाँ मुख्य द्वार से अंदर पहुंचते ही दायीं तरफ पहले धूमेश्वर महादेव मंदिर और फिर श्रीराम केवट मंदिर आता है। थोड़ी दूर पर ही श्री राधा कृष्ण, श्री गणेश और श्री हनुमान के प्राचीन मंदिर भी हैं। ऐसी मान्यता है कि मंडूक ऋषि ने यहीं पर मंडूकोपनिषद की रचना की थी. उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम मंडूक पड़ा. यहां खुदाई में कुछ ऐसे अवशेष मिले हैं, जो 11वीं शताब्दी के कल्चुरी कालीन मंदिरों की श्रृंखला से मिलते-जुलते हैं| वर्ष 1985 से यहां श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर में पुजारी के तौर पर काम कर रहे वीरेंद्र कुमार शुक्ला बताते हैं, पुरा मंदिरों के समूह वाला गर्भगृह पहले समतल था। जब खुदाई हुई तो वहां 19 मंदिरों के भग्नावशेष और कई प्रतिमाएं बाहर आईं। इसमें 6 शिव मंदिर, 11 स्पार्तलिंग और एक-एक मंदिर क्रमश: उमा-महेश्वर और गरुड़ारूढ़ लक्ष्मी-नारायण मंदिर मिले हैं। खुदाई के बाद वहां बिखरे पत्थरों को मिलाकर मंदिरों का रूप दिया गया।

लगभग 18 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ प्रांत की इतिहास संकलन समिति के सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री शांताराम सर्राफ के मार्गदर्शन में इस द्वीप के प्राचीन गौरवशाली इतिहास और पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखकर मदकू द्वीप का व्यापक सर्वेक्षण किया। इस द्वीप पर प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेषों, प्राचीन यज्ञशाला, भग्न देव प्रतिमाओं और खंडित मंदिरों के पाषाण-अवशेषों से निर्मित मंदिरों का गहन अध्ययन किया। यहां प्राप्त शिलालेखों के अनुसार 11वीं शताब्दी में यहां के मंदिर उच्चतम स्थिति में थे। पुरातत्वविदों के मतानुसार इस द्वीप का निर्माण प्रागैतिहासिक काल में हुआ था। द्वीप पर कच्छप (कछुए) आकार की पीठ में आधा दर्जन से अधिक मंदिर हैं। मदकू द्वीप को अति पवित्र स्थल माना जाता है क्योंकि इस स्थान पर आकर शिवनाथ नदी उत्तर पूर्व वाहिनी हो जाती है। दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी में रतनपुर के कलचुरी शासक यहां यज्ञानुष्ठान आदि संपन्न किया करते थे। पुरातत्वविदों तथा इतिहासकारों का मत है कि विष्णु पुराण में जिस मंडूक द्वीप का उल्लेख है, वह यही स्थल है। यहां हर साल फरवरी महीने में मसीही मेला लगता है. बोटिंग, सन सेट का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं|