Sunday, September 22, 2019
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शत-प्रतिशत गिरदावरी कराएं : मुख्य सचिव 

०० सीमावर्ती जिलों में धान उपार्जन केंद्रों की निगरानी  हेतु 15 अक्टूबर से प्रारंभ करें चेक पोस्ट 

०० मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को दिए निर्देश 

रायपुर| मुख्य सचिव श्री सुनील कुजूर ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिला कलेक्टरों को शत् प्रतिशत गिरदावरी, भू-अर्जन के प्रकरणों का मुआवजा वितरण, आर.आर.सी. की वसूली, पर्यावरण एवं अधोसंरचना के उपकर की वसूली सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सीमावर्ती राज्यों से लगे जिलों के धान उपार्जन केन्द्रों की निगरानी के लिए 15 अक्टूबर से चेक पोस्ट प्रारंभ कर लिया जाए। साथ ही इन क्षेत्रों के धान खरीदी केन्द्रों की निगरानी के लिए पृथक से अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा है कि इस माह के अंत तक शत-प्रतिशत गिरदावरी का काम पूरा कर लिया जाए। गिरदावरी के आधार पर ही किसानों और उनकी उपज का आंकलन किया जा सकेगा। धान खरीदी के दौरान खरीदी के लक्ष्य में संशोधन के प्रस्ताव मान्य नहीं किए जाएंगे। अतः गिरदावरी के आधार पर लक्ष्य का निर्धारण किया जाए। सिंचित एवं असिंचित क्षेत्र में उपज के उत्पादन का आंकलन, दलहन-तिलहन, मक्का, गन्ना आदि के क्षेत्रफल का भी विशेष ध्यान रखा जाए। भू-अर्जन के मुआवजा वितरण के लंबित प्रकरणों की जानकारी पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कलेक्टरों से कहा है कि मुआवजा के वितरण के कार्य में तेजी लायी जाए। बलरामपुर, मुंगेली, कबीरधाम, बालोद जिले में रिकार्ड अद्यतन नहीं होने के कारण मुआवजा वितरण में विलंब की जानकारी दिए जाने पर मुख्य सचिव ने अप्रसन्नता व्यक्त की। भू-अर्जन की प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद चिन्हित जमीन का डायवर्सन किए जाने को उन्होंने गम्भीरता से लिया है और बिलासपुर और बस्तर जिले के कलेक्टरों को इस संबंध में विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। आर.आर.सी. (राजस्व वसूली) की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा है कि ऐसे देनदार जो सक्षम हैं और वसूली देने में लापरवाही बरत रहे हैं उनकी सूची बनाई जाए और कार्यालय में चस्पा किए जाएं। राज्य में 18 हजार 201 प्रकरणों में 289 करोड़ रूपए की वसूली की जानी है। रायपुर, रायगढ़, दुर्ग, बस्तर, बिलासपुर, महासमुंद, मुंगेली, बेमेतरा में वसूली के अधिक प्रकरण लंबित पाए गए हैं। इसी तरह वर्तमान में कार्यरत पंचायत पदाधिकारियों एवं पूर्व पंचायत पदाधिकारियों से वसूली में भी तेजी लानेे के निर्देश है। राज्य भर में 34 करोड़ 23 लाख रूपए की वसूली पंचायत पदाधिकारियों से की जानी है। पर्यावरण एवं अधोसंरचना उपकरों की वसूली की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण को प्रभावित करने वाले सभी कार्यों के लिए निर्माण एजेंसियों से उपकर की वसूली की जाए। उन्होंने जिला कलेक्टरों को जानकारी दी कि इस वर्ष 4 सितम्बर से पर्यावरण एवं अधोसंरचना उपकर की राशि में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। पूर्व में 7.50 रूपए अधोसंरचना और 7.50 रूपए पर्यावरण उपकर (कुल 15 रूपए) के रूप में वसूले जाते थे। अब यह राशि बढ़कर 11.25 रूपए अधोसंरचना और 11.25 रूपए पर्यावरण उपकर (कुल 22.50 रूपए) की वसूली की जाएगी। वन अधिकार मान्यता पत्रों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सामुदायिक उपयोग के लिए मान्यता पत्र वितरित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नगरीय निकायों में बजट की उपलब्धता के बाद भी निर्माण कार्यो में तेजी नही होने की स्थिति पर भी अप्रसन्नता जतायी। मुख्य सचिव ने नगरीय क्षेत्रों में स्वीकृत एवं बजट उपलब्ध कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कलेक्टरों को जानकारी दी कि नगरीय क्षेत्रों में जिन पट्टों का तीन बार नवीनीकरण किया जा चुका है उन्हें फ्री-होल्ड करने के कार्रवाई शुरू की जानी है। इसके लिए सभी जानकारियां संकलित रखने के निर्देश दिए गए हैं। वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अपर मुख्य सचिव कृषि श्री के.डी.पी. राव, सचिव खाद्य डॉ.कमलप्रीत सिंह, सचिव राजस्व श्री एन.के. खाखा, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री टी.सी. महावर, सचिव सामान्य प्रशासन सुश्री रीता शांडिल्य, सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास श्रीमती अलरमेल मंगई डी., विशेष सचिव खनिज साधन श्री अन्बलगन पी., छत्तीसगढ़ राज्य विपणन सहकारी संघ की संचालक श्रीमती शम्मी आबिदी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।