Friday, November 22, 2019
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बस्तर क्षेत्र के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र नही : दीपक बैज

रायपुर। बस्तर क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र नही खुलने को लेकर बस्तर सांसद दीपक बैज ने मानसून सत्र के प्रश्नकाल में सवाल उठाये। बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा कि ब्रांडेड कंपनियों के जीवन रक्षक दवाईयों की ऊंची कीमतो के कारण बस्तरवासी को बिमारियों के उपचार में गंभीर आर्थिक संकट से गुजरना पड़ता है। प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र बस्तर में नहीं खुल पाया है। प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र की जनेरिक दवाईयों एवं ब्रांडेड कंपनियों के दवाईयो के कीमत में भारी अंतर है। ब्रांडेड कंपनियों के दवाईयों के कीमत के निर्धारण करने एवं उन्हें नियंत्रित कौन करेगा?

बस्तर सांसद दीपक बैज ने लोकसभा के मानसून सत्र में प्रश्नकाल में पूछा पूरे देश मे कुल ’5028 प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र चल रहे है। जिसमें छत्तीसगढ़ में206 केंद्र है। फिर बस्तर क्षेत्र के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र संचालित क्यों नही की गयी। सांसद दीपक बैज ने कहा कि प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्रों में 714 दवा उपलब्ध रहती है। बस्तर में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र नही होने के कारण बस्तरवासी मंहगी दवाई खरीदने मजबूर है। बीमारी के दौरान महंगी दवाओं के कारण लगभग 6 से 8 करोड़ लोग गरीब हो रहे है, जबकि ब्रांडेड दवाओं के नियंत्रण डीपीओ के द्वारा तय किया जाता है क्या सरकार को दवा कंपनियों पर नियंत्रण नही है? क्या निजी डॉक्टरों के द्वारा सस्ती दवा लिखने हेतु सरकार कानून बनाएगी? बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा किक्या रसायन और उवर्रक मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : ब्रांडेड तथा जनेरिक दवाइयों की कीमत में कितना अंतर है तथा कंपनियां द्वारा निर्मित ब्रांडेड दवाईयों की कीमत के निर्धारण हेतु विद्यमान तंत्र का ब्यौरा क्या है? क्या कंपनियां ब्रांडेड दवाईयों की कीमतों का निर्धारण करने के लिये स्वतंत्र है और यदि हां,तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है। रोगियों को जेनरिक दवाइंया उपलब्ध कराने के लिये प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के अंतर्गत विगत पांच वर्षो के दौरान खोले गये औषधि केन्द्रों की राज्यवार संख्या कितनी है। क्या जेनरिक औरषधि केन्द्रों में दवाइयां उपलब्ध नहीं होती है जिसके कारण रोगियों को मजबूरन ब्रांडेड दवाईयां खरीदनी पड़ती है और उक्त योजना के प्रचार-प्रसार के लिये उक्त अवधि के दौरान व्यय की गई राशि का ब्यौरा क्या है?
 
उत्तर :- 
एक विवरण सभा पटल पर रख दिया गया है। 
ब्रांडेड और जेनरिक दवाईयों से संबंधित दिनांक 09.07.2019 को पूछे जाने वाले लोकसभा तारांकित प्रश्न संख्या 22 के उत्तर में संदर्भित विवरण

(क)और(ख) राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) डीपीसीओ के प्रावधानों के अनुसार औषध (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (डीपीसीओ) की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट अनुसूचित दवाइंयो के अधिकतम मूल्य निर्धारित करता है। अनुसूचित दवाईयों (ब्रांडेड या जेनरिक) के सभी विनिर्माताओं को एनपीपीए द्वारा निर्धारित अधिकतम मूल्य (लागू स्थानीय करों सहित) के अन्दर ही अपने उत्पादों को बेचना होता है। कोई भी विनिर्माता अपने द्वारा प्रारंभ किये गये किसी गैर-अनुसूचित सम्मिश्रण (ब्रांडेड एवं जेनरिक) का अधिकतम खुदरा मूल्य निर्धारित करने के लिये स्वतंत्र होता है। तथापि, डीपीसीओ के अनुसार, गैर-अनुसूचित सम्मिश्रणों के विनिर्माताओं को इस तरह के सम्मिश्रणों के अधिकतम खुदरा मूल्य को प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की अनुमति नही है। 
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत बेची जाने वाली दवाईया जेनरिक होती है और सदृश दवाईयों के शीर्ष तीन ब्रांडों के औसत मूल्य से 50-90 प्रतिशत तक सामान्यतः सस्ती होती है। 

(ग) पिछले पांच वर्षो में अर्थात 01.04.2014 से 31.032019 तक, कुल 5028 प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) केंद्र देश भर में खोले गये है। इसका राज्यवार ब्यौरा अनुलग्नक में दिया गया है। 

(घ) पीएमबीजेपी की उत्पाद संख्या में 900 दवाएं और 154 शल्य चिकित्सा एवं उपभोज्य सामग्रियां सम्मिलित है। इस उत्पाद संख्या में से, 714 दवाएं और 53शल्य चिकित्सा सामग्रियां पीएमबीजेपी केंद्रो में बिक्री के लिये उपलब्ध है। 24 दवाओं और 90 शल्य चिकित्सा सामग्रियों की खरीद के लिये क्रय आदेश पहले ही जारी किये जा चुके है और ये दवाएं/शल्य चिकित्सा सामग्रियां अगले दो महीनों में पीएमबीजेपी केन्द्रों पर बिक्री के लिये उपलब्ध होंगी। 162 दवांओ और 11शल्य चिकित्सा सामग्रियों के लिये, पिछली दो निविदा में कोई भी बोली प्राप्त नहीं हुई थी। अपेक्षित दवाओं के लिये निविदाएं आमंत्रित करना एक सत्त प्रक्रिया है। 

(ड) पीएमबीजेपी के प्रचार पर व्यय राशि का ब्यौरा निम्नानुसार है :

क्रं. सं. – वित्तीय वर्ष- राशि (करोड़ रूपये)

1         2014-15            0.52
2         2015-16             0.94
3         2016-17             0.26
4         2017-18             4.74
5         2018719            6.60