Tuesday, April 7, 2020
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मस्तूरी नसबंदी कांड की मुख्य सर्जन को स्वास्थ्य विभाग ने दिया गया अभयदान

०० मस्तुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ नंदराज कवर के खिलाफ की जानी चाहिए कड़ी कार्यवाही

बिलासपुर| मस्तूरी नसबंदी की मुख्य सर्जन शिला सहाय थी जिसके द्वारा सभी महिलाओं का लापरवाही पूर्वक ऑपरेशन किया गया था। सूत्रों का कहना है कि सर्जन सहाय का अड़ियल रवैया रहता है किसी भी स्टाफ के सांथ इनकी पटरी नही बैठती है। यहाँ तक ये जो मस्तूरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सप्ताह में 2 से 3 बार ही जाती है, और 1घंटे रहकर बिलासपुर आ जाती है,शासन द्वारा इनके खिलाफ कार्यवाही न करना समझ से परे है,सर्जन होने के नाते सारी जिम्मेदारी शिला सहाय की ही बनती है,जिसे किन कारणों से स्वास्थ्य विभाग ने अभयदान दिया है,जो की बहुत ही बड़ा प्रश्न का विषय है,जो कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। प्रदेश भर में चर्चा का विषय है। वही नीचे वर्ग के बेक़शुर कर्मचारियों के खिलाफ किये गए कार्यवाही होने पर ।आम आदमी और मीडिया जगत में जमकर चर्चा है।

मस्तूरी से सीएमओएच कार्यालय बिलासपुर में किये गए अटैच कर्मचारियों को किया गया रिलीव :- मस्तूरी नसबंदी कांड का सच्चाई जब स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुची और सीएम ने जांच का तत्काल आदेश जारी किया तो भारत भूषण बोर्डे जो कि स्वास्थ्य एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी है,जिनके द्वारा बड़ी चतुराई से मस्तूरी से जितने भी कर्मचारी को कार्यालय में अटैच कर रखे थे, सबको तत्काल रिलीव किया गया,चुकी शासन ने अटेचमेंट खत्म कर दिया है।जिसकी जानकारी उच्च अधिकारी को न हो इसलिए ये कार्य किया गया।कई कर्मचारी तो बोर्डे के बंगले में मजदूरों की तरह कार्य करते थे,जिनसे जैसे कपड़े धुलवाना,झाड़ू लगाना सफाई करना, कुत्तो को नहलाना एवं घुमाने ले जाना जैसे मजदूरी का कार्य करवाया जाता था।जिन्हे कुछ दिनों के लिये तो फिलहाल मुक्ति मिल गई है,और उन्हें रिलीव कर वापस मस्तूरी भेजा भेजा गया है।

मलेरिया विभाग के 3 कर्मचारियों को अभी भी बोर्डे द्वारा अटैच कर रखा गया है :- सूत्रों का कहना है की जिला मलेरिया अधिकारी राजेश शुक्ला दोनों मिलकर  झोलाछाप डॉक्टरो की आड़ में और हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर, ताबड़तोड़ कार्यवाही किये और जब सब से रुपये का लेनदेन का सेटिंग हो गया तब से कोई कार्यवाही नही हो रही है,बड़े- बड़े नर्सिंग होम धड़ल्ले संचालित हो रहे है।और महीने में इन अधिकारियों तक लिफाफा पहुच जा रहा है।पीस रहे है,छोटे डॉक्टर जो अपनी सेटिंग इन तक नही बना पाए है।जिनके खिलाफ ये अधिकारी कार्यवाही करते है। जिला मलेरिया कार्यालय के तीन कर्मचारियों को सीएमएचओ द्वारा अपने कार्यकाल में अटैच कर रखा गया है,जिसमे से महिला भी है।सूत्रों का कहना है,की इन भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से छोटे कर्मचारी के अधिकार का दोहन हो रहा है