Thursday, February 27, 2020
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राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था, किसानों की बदहाल स्थिति पर भाजपा सरकार को बर्खास्त कर लागु किया जाए राष्ट्रपति शासन : कांग्रेस

०० बदहाल किसानों को प्रताड़ित करने पर उतर आई है रमन सरकार 

०० सूखा पीड़ित किसानों की राहत राशि और बीमे की राशि का ऋण में समायोजन ग़लत, न बीज मिल रहे हैं और न सही दाम पर खाद

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक धनेन्द्र साहू, पूर्व मंत्री एवं विधायक सत्यनारायण शर्मा, पूर्व मंत्री मो. अकबर ने कांग्रेस भवन रायपुर में पत्रकारवार्ता में राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था, किसानों की बदहाल स्थिति को लेकर राज्य में भाजपा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन की मांग की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान पहले से ही बदहाल हैं। वादों के बाद भी 2100 रुपए समर्थन मूल्य और हर साल 300 रुपए बोनस न मिलने से वे यूं भी परेशान थे। फिर पिछले साल उन्होंने एक बड़ा सूखा झेला है। केंद्र सरकार ने माना था कि राज्य के 27 जिलों में से 21 सूखा ग्रस्त हैं। राज्य की भाजपा सरकार की विफलता है कि वह केंद्र की अपनी ही पार्टी की सरकार से सूखा राहत के लिए पर्याप्त राशि नहीं ले सकी।

कांग्रेस नेताओ ने कहा कि राज्य ने केंद्र से 4401 करोड़ की राशि मांगी थी लेकिन केंद्र ने दस प्रतिशत से भी कम यानी 395.31 करोड़ की राशि स्वीकृत की। यह राशि आकर पड़ी रही और किसानों को समय पर नहीं दी गई. सरकार को जवाब देना चाहिए कि यदि केंद्र से राशि मिल गई थी तो इसका आवंटन क्यों नहीं किया गया। पूरे एक साल बाद जब सूखा राहत की राशि दी भी जा रही है तो इसका समायोजन ऋण की राशि में कर दिया जा रहा है। इसी तरह फसल बीमा करवाने वाले किसानों को बीमे की हास्यास्पद राशि दी जा रही है. दो चार रुपयों जैसी राशि भी बीमा कंपनियों द्वारा जारी किए गए हैं। यह अपमान मानों कम था कि सरकार ने बीमे की राशि को भी ऋण में समायोजित करने का फ़ैसला कर लिया। इसके अलावा बोनस की राशि को भी ऋण में समायोजित किया जा रहा है। जिन किसानों के खाते में ऋण समायोजित करने योग्य पैसा नहीँ आया उन किसानों से सरकार 12.5 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूल रही है।  जब राज्य के 21 ज़िलों में सूखा था तो नियमानुसार उन्हें दूसरी फसल के लिए बीज उपलब्ध करवाना था, लेकिन नहीं करवाया गया। इसके अलावा सरकार को नई फसल के लिए प्राथमिकता के आधार पर बीज उपलब्ध करवाना था। लेकिन संवेदनहीन रमन सरकार किसानों को बीज भी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है. किसान दर दर भटक रहे हैं। ‘विकास यात्रा’ में जनता की गाढ़ी कमाई से भाजपा का प्रचार करने में जुटे मुख्यमंत्री यह भूल गए कि किसानों के लिए समय पर बीज भी उपलब्ध करवाना है। सूखे के समय बीज की इस किल्लत ने किसानों को हलाकान कर दिया है।

कांग्रेस नेताओ ने कहा कि अगर किसानों को लेकर सरकार ज़रा भी संवेदनशील होती तो वह प्राथमिकता से खाद उपलब्ध करवाती जिससे कि सूखे के बाद किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। लेकिन ज़मीनी वास्तविकता एकदम उलट दिखती है। यूरिया खाद की बोरी में पांच पांच किलो तक कम वज़न निकल रहा है। पोटाश के दाम बढ़ा दिए गए हैं। कुल मिलाकर पहले से बदहाल किसानों को परेशान करने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। रमन सिंह के तीन कार्यकाल को जब भी इतिहास में याद किया जाएगा तो इसलिए याद किया जाएगा कि ख़ुशहाल किसानों के राज्य छत्तीसगढ़ को उन्होंने किसानों के लिए एक त्रासदी भरे प्रदेश में बदल दिया। उनके ही राज में किसान आत्महत्या की घटनाएं बेतहाशा बढ़ीं. पिछले ढाई साल में ही 1500 से ज़्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली है| कांग्रेस नेताओ ने मांग करते हुए कहा कि पिछले साल के सूखे को ध्यान में रखते हुए किसानों का ऋण माफ़ करने की घोषणा की जाए और अगर सरकार ऐसा नहीं करना चाहती तो कम से कम ऋण की वसूली बिना ब्याज के स्थगित कर दी जाए। किसानों को अविलंब बीज उपलब्ध करवाए जाएं ताकि किसान समय से बोनी का काम शुरु कर सकें। बीमा कंपनियों के ख़लिफ़ कार्रवाई की जाए जिसने दो चार रुपयों जैसी हास्यास्पद राशि बीमे के रूप में दी है। कम वजन का खाद देने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जाए और अगर इसमें अधिकारियों की मिली भगत है तो उन्हें सज़ा दी जाए। खाद के दामों में हुई बढ़ोत्तरी तुरंत वापस ली जाए।