छत्तीसगढ़ सरकार की रीति-नीति बता रही, कांग्रेस अब भी आपातकाल की दुर्दांत मानसिकता से उबरी नहीं है : उपासने

०० लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि संबंधी नियम को निरस्त कर बघेल सरकार ने संविधान व न्यायपालिका की अवमानना की

०० कांग्रेस लोकतंत्र व आज़ादी की दुहाई न दे, अब वह संघ-परिवार और राष्ट्रवादी संगठनों व दलों की विरासत : उपासने

रायपुर। लोकतंत्र सेनानी संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा है कि देश पर आपातकाल थोपकर तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने लाखों निरपराध लोगों को ज़ेलों में ठूसकर अमानवीय अत्याचार की पराकाष्ठा की थी। देश के लाखों परिवार आज भी आपातकाल के उन दंशों की यातना सह रहे हैं। श्री उपासने ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सत्ता में आते ही कांग्रेस की सरकार ने जिस तरह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना का परिचय दिया और आपातकाल के दौर में लोकतंत्र के सेनानी रहे लोगों की सम्मान निधि को बंद करने का फैसला लिया गया उससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि कांग्रेस के नेता आज भी आपातकाल की दुर्दांत मानसिकता से उबरे नहीं हैं।
लोकतंत्र सेनानी संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री उपासने ने कहा कि हाई कोर्ट ने एक साल की सम्मान निधि देने का आदेश भी दिया लेकिन कांग्रेस की सरकार की न्यायपालिका पर भी कितनी आस्था है, यह इसी से साफ हो जाता है कि अब तक इस आदेश पर भी सरकार ने अमल नहीं किया और अब तो आपातकाल के समान ही न्यायालयीन आदेशों को रद्दी की टोकरी में फेंककर अपनी हठधर्मिता से, जिन नियमों के आधार पर न्यायालयीन आदेश हुए, उन्हें ही भूतलक्षी प्रभाव से निरस्त करने जैसा असंवैधानिक कृत्य करके प्रदेश सरकार ने यह साफ कर दिया है कि न तो उसका लोकतंत्र में विश्वास है और न ही संविधान व न्यायपालिका में कोई आस्था है। श्री उपासने कहा कि कांग्रेस को तो अब लोकतंत्र की दुहाई देने का भी कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है क्योंकि आपातकाल के रूप में उसने लोकतंत्र को लहूलुहान कर दिया था। कांग्रेस जिस आज़ादी और लोकतंत्र की दुहाई देती है, उसे तो वह 1975 में ही आपातकाल लगाकर ख़त्म कर चुकी है। लोकतंत्र सेनानी संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री उपासने ने कहा कि आज देश लोकतांत्रिक परिवेश में आज़ादी को अनुभव कर रहा है, वह संघ-परिवार, भारतीय जनसंघ समेत तमाम राष्ट्रवादी विचारों वाले राजनीतिक, सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों की विरासत है। आज जो लोकतंत्र है, वह तो आपातकाल की यंत्रणा भोगकर लोकतंत्र की रक्षा में अपना सर्वस्व दाँव पर लगा चुके लोगों की तपस्या का सुफल है। श्री उपासने ने कहा कि लोकतंत्र के सेनानियों की सम्मान निधि बंद करके प्रदेश सरकार ने कांग्रेस के उसी राजनीतिक चरित्र का निर्लज्ज प्रदर्शन किया है जिसका संविधान, लोकतंत्र और स्वतंत्रता की भावना से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। श्री उपासने ने कहा कि देशभर के लोकतंत्र सेनानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहब देवरस, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, पूर्व प्रधानमंत्री द्वय स्व. मोरारजी भाई देसाई व स्व. अटलबिहारी वाजपेयी आदि के विचारों व संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेणा लेकर हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

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